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भाजपा विधायक के पिता को भी सीमांकन के लिए लगाने पड़ रहे चक्कर!

पटवारी की कथित टालमटोल से अटका जमीन का सीमांकन, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

सिंगरौली। प्रदेश में भाजपा की सरकार और सिंगरौली विधानसभा से भाजपा विधायक रामनिवास शाह के प्रतिनिधित्व के बावजूद विधायक के पिता को अपनी जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ने का मामला सामने आया है। आरोप है कि संबंधित पटवारी द्वारा सीमांकन की कार्रवाई में कथित तौर पर टालमटोल की जा रही है। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।बताया गया है कि उमा प्रसाद शाह, भाजपा विधायक रामनिवास शाह के पिता, अपनी जमीन के सीमांकन को लेकर लंबे समय से राजस्व कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। आरोप है कि आवेदन के बावजूद संबंधित पटवारी द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

आम आदमी के लिए व्यवस्था पर सवाल
मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब एक मौजूदा विधायक के पिता को भी सीमांकन जैसे सामान्य राजस्व कार्य के लिए परेशान होना पड़ रहा है, तो आम ग्रामीण और गरीब व्यक्ति की स्थिति क्या होगी। जमीन की सीमा स्पष्ट करने के लिए सीमांकन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें देरी से पड़ोसी विवाद, कब्जे और कानूनी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

जांच से सामने आएगी देरी की वजह
मामले में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि सीमांकन के लिए आवेदन कब किया गया, पटवारी को कब निर्देश मिले और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यदि किसी तकनीकी या कानूनी कारण से सीमांकन लंबित है, तो आवेदक को इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए।
हालांकि, पटवारी या राजस्व विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में जिला प्रशासन से सीमांकन आवेदन, राजस्व अभिलेख और संबंधित कार्रवाई की जांच कराने की मांग की गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सीमांकन में देरी प्रशासनिक प्रक्रिया, लापरवाही या किसी अन्य कारण से हुई।मुद्दा सिर्फ विधायक के पिता का नहीं, बल्कि राजस्व कार्यालयों में आम नागरिकों को समय पर और पारदर्शी सेवा मिलने का भी है।

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