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बिजली की बढ़ती मांग के बीच गहराया कोयला संकट

बारिश से खदानों में जलभराव और सड़कें खराब, ताप बिजली संयंत्रों में कोयला स्टॉक 17 दिन से घटकर 9 दिन पर आया

नई दिल्ली। मानसून की लगातार बारिश ने देश में कोयला उत्पादन और उसकी ढुलाई को प्रभावित किया है। दूसरी ओर जुलाई-अगस्त 2026 में बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने से ताप बिजली संयंत्रों पर कोयले की खपत बढ़ गई। इसका असर संयंत्रों में उपलब्ध कोयला भंडार पर पड़ा है। करीब दो महीने पहले बिजली संयंत्रों के पास औसतन 17 दिनों का कोयला स्टॉक था, जो अब घटकर करीब 9 दिन रह गया है।

कोयला मंत्रालय के मुताबिक पूर्वी और मध्य भारत के कोयला क्षेत्रों में बारिश अब कम होने लगी है। इससे उत्पादन और ढुलाई में तेजी आने की उम्मीद है। सितंबर के शुरुआती तीन दिनों में औसत दैनिक कोयला उत्पादन करीब 13.6 लाख टन था, जो 4 सितंबर को बढ़कर लगभग 17 लाख टन पहुंच गया। मंत्रालय का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह में खदानों के आसपास की जमीन सूखने से कोयले की ढुलाई और तेज हो सकती है।

उत्पादन घटा, बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर

आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में कोल इंडिया लिमिटेड का कोयला उत्पादन पिछले साल की तुलना में 5.6% घटकर करीब 4.75 करोड़ टन रहा। इसके उलट बिजली की मांग लगातार बढ़ी। जुलाई 2026 में बिजली की खपत करीब 270.30 लाख मेगावाट और अगस्त में 258.27 लाख मेगावाट तक पहुंची। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में क्रमश: करीब 11% और 12.85% अधिक है।

बढ़ती मांग के बावजूद कोल इंडिया ने बिजली क्षेत्र की आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की है। अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान कंपनी ने 32.29 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति की, जो पिछले साल की समान अवधि के 30.26 करोड़ टन से 6.70% अधिक है।

अगस्त में बिजली क्षेत्र को 4.48 करोड़ टन कोयला

अगस्त में कुल कोयला आपूर्ति करीब 6 करोड़ टन रही, जो पिछले साल अगस्त से 5.50% अधिक है। इसमें बिजली क्षेत्र को करीब 4.485 करोड़ टन कोयला दिया गया, जो सालाना आधार पर 4.5% अधिक है। हालांकि उत्पादन में कमी और बिजली की खपत बढ़ने से संयंत्रों के स्टॉक पर दबाव बना हुआ है।

खदानों में पानी से उत्पादन और ढुलाई प्रभावित

मानसून के दौरान कई कोयला खदानों में जलभराव हो गया। खदानों को जोड़ने वाली आंतरिक सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे कोयले को बाहर निकालने और हैंडलिंग प्लांट तक पहुंचाने में परेशानी आई। इन परिस्थितियों ने उत्पादन के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था को भी प्रभावित किया।

सरकार के मुताबिक कोल इंडिया की खदानों के पास करीब 7.6 करोड़ टन कोयला स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा करीब 4.6 करोड़ टन का अतिरिक्त स्टॉक भी उपलब्ध बताया गया है। बारिश कम होने के साथ खदानों में नमी और जलभराव घटाने का काम तेज किया जा रहा है।

बिजली संयंत्रों को अतिरिक्त कोयला लेने की छूट

कोयला आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए बिजली संयंत्रों को वार्षिक अनुबंध की मात्रा से अधिक कोयला लेने की अनुमति दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि बारिश कम होने के साथ उत्पादन और ढुलाई में तेजी आएगी और संयंत्रों में कोयला स्टॉक धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।

फिलहाल बिजली की रिकॉर्ड मांग और मानसून से प्रभावित कोयला उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और कोल इंडिया के लिए बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में कोयला उत्पादन और परिवहन की रफ्तार यह तय करेगी कि बिजली संयंत्रों में स्टॉक कितनी तेजी से सामान्य स्तर पर लौटता है।

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