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यूएन में ‘इक्वल अर्थ’ मैप के समर्थन में भारत

भारत ने कहा- सीमाओं और क्षेत्रों का भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं, प्रस्ताव के पक्ष में पड़े 164 वोट; अमेरिका ने किया विरोध

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व मानचित्र को लेकर पेश किए गए ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। भारत ने ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ वाले मानचित्र के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों और क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाया जाना चाहिए। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया और छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिनमें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों का आकार अधिक संतुलित और वास्तविक अनुपात में दिखाई दे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव किसी एक विशेष विश्व मानचित्र या प्रोजेक्शन को आधिकारिक रूप से अपनाने की बात नहीं करता।

मरकेटर प्रोजेक्शन की जगह इक्वल अर्थ की सिफारिश

प्रस्ताव में लोकप्रिय ‘मरकेटर प्रोजेक्शन’ आधारित मानचित्रों के विकल्प के तौर पर ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। मरकेटर प्रोजेक्शन में उत्तरी गोलार्ध के कई देशों और क्षेत्रों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में बड़ा दिखाई देता है। इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का उद्देश्य महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अपेक्षाकृत सही अनुपात में प्रदर्शित करना है।

राजनीतिक सीमाओं पर प्रस्ताव में कोई फैसला नहीं

भारत ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव का संबंध राजनीतिक मानचित्रों से जुड़े विवादों से नहीं है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से जुड़े किसी मुद्दे पर निर्णय नहीं किया गया है। भारत ने केवल दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के क्षेत्रफल को अधिक निष्पक्ष ढंग से दर्शाने के उद्देश्य का समर्थन किया है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर रुख स्पष्ट

भारत ने मतदान के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में उसका रुख स्पष्ट है। भारत ने दोहराया कि उसके संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं, का चित्रण भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही होना चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की सीमाओं या क्षेत्रों का गलत अथवा भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर भारत का रुख लगातार एक जैसा और समझौता न करने वाला रहा है।

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