डॉक्टरों पर हमला करने वालों को खुला न छोड़ें, सुप्रीम कोर्ट सख्त
राजनीतिक नेताओं और समर्थकों की मारपीट पर तत्काल हिरासत के निर्देश, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

नई दिल्ली। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा कथित मारपीट की घटनाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे आरोपियों को खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और कानून के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए।
मामला कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना पार्षद रमेश सुक्रिया म्हात्रे ने जमानत की शर्तों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान उनके वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस ले ली। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत को बताया कि म्हात्रे की जमानत रद्द कराने के लिए पहले ही आवेदन दिया जा चुका है। अदालत ने इस पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 28 सितंबर तय की।
मामला पालघर के रिलीफ अस्पताल में दही हांडी उत्सव के दौरान घायल मरीज के उपचार और छुट्टी को लेकर हुए विवाद से भी जुड़ा है। आरोप है कि कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों और समर्थकों ने आपातकालीन विभाग में पहुंचकर डॉक्टरों व कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया। अस्पताल के सीसीटीवी में एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने और महिला कर्मचारी को धमकाने की घटना सामने आने का दावा किया गया है।
अस्पताल की शिकायत पर पुलिस ने शिवसेना नेताओं समेत 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जा सकता।













