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कलेक्टर की जनसुनवाई में विस्थापित ने दी आत्महत्या की चेतावनी: टीएचडीसी व भू-अर्जन अधिकारियों पर लगाया मुआवजे में धांधली का आरोप

सिंगरौली।जिला मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित कलेक्टर की जनसुनवाई में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब टीएचडीसी (THDC) परियोजना के एक विस्थापित ने मुआवजे में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए न्याय न मिलने पर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की चेतावनी दे दी। पीड़ित ने एक भावनात्मक और कड़े शब्दों वाला पत्र कलेक्टर को सौंपा है, जिसमें उसने मानसिक प्रताड़ना के कारण ब्रेन हेमरेज होने तक का दावा किया है।

6 वर्षों से भटक रहा पीड़ित, 6 मकानों व तालाब का नहीं मिला मुआवजा
कलेक्टर को 8 सितंबर 2026 (08.09.2026) को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्राम पिड़रवाह के पुश्तैनी निवासी और वर्तमान में कुंदा पचौर में रह रहे सूरज पटेल (पिता रामजी पटेल) ने बताया कि वह पिछले 6 वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। वर्ष 2017-18 में उनकी संपत्ति का मूल्यांकन किया गया था, लेकिन वैधानिक तरीके से सही नापजोख नहीं हुई।

पत्र के अनुसार, खसरा नंबर 261 स्थित मकान नंबर 112 व 517 तथा खसरा नंबर 339 स्थित मकान नंबर 153, 153/1 व 154 सहित कुल 6 मकानों, फलदार वृक्षों और एक तालाब की मुआवजा राशि उन्हें आज तक नहीं मिली है। सूरज पटेल का आरोप है कि देवसर भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों और टीएचडीसी कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से उनका लगभग 20 से 30 लाख रुपये का मुआवजा अवैध रूप से दूसरे लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया है।

‘न्याय नहीं मिला तो दे दूंगा जान, प्रशासन होगा जिम्मेदार’
पीड़ित का कहना है कि वह कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और टीएचडीसी कंपनी को दर्जनों बार शिकायती पत्र दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस उपेक्षा से उन्हें इतनी मानसिक पीड़ा पहुंची है कि उनका ब्रेन हेमरेज हो चुका है।
अपने पत्र में सूरज पटेल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार उनकी संपत्ति, मकान, तालाब और फलदार वृक्षों की पुनः मापी व मूल्यांकन कराकर उनकी समस्या का निराकरण नहीं किया गया, तो वह आत्मग्लानि के कारण आत्महत्या कर लेंगे। उन्होंने अपने इस आत्मघाती कदम के लिए कंपनी प्रबंधन, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार बरगवां और थाना प्रभारी बरगवां को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
इस गंभीर शिकायत और खुली चेतावनी के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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