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वित्तीय अनियमितताओं पर जिला पंचायत सीईओ की सख्त कार्रवाई

दो ग्राम पंचायतों में 31.50 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता, दोषियों के विरुद्ध वसूली एवं दंडात्मक कार्रवाई

सिंगरौली, । जिला पंचायत सिंगरौली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संघ प्रिय द्वारा ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के नाम पर शासकीय राशि के दुरुपयोग एवं वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों में संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध वसूली तथा दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
ग्राम पंचायत खुटार निवासी लक्ष्मी नारायण द्वारा की गई शिकायत के आधार पर गठित संयुक्त जांच दल ने 11 जून 2026 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जांच में विभिन्न निर्माण कार्यों में कुल 20 लाख 82 हजार 368 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए 8 सितंबर 2026 को वर्तमान सरपंच श्रीमती सरिता पनिका के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया तथा 10 लाख 41 हजार 184 रुपये की वसूली के लिए धारा 92 के अंतर्गत नोटिस जारी किया गया है। इसी प्रकरण में तत्कालीन सचिव अशोक कुमार शाह, वर्तमान सचिव ग्राम पंचायत रौंदी, के विरुद्ध भी धारा 92 के तहत कार्रवाई करते हुए 10 लाख 41 हजार 184 रुपये की वसूली हेतु नोटिस जारी किया गया है।

ग्राम पंचायत खटाई की वर्तमान सरपंच श्रीमती हिरामन देवी साहू द्वारा 30 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत शिकायत के आधार पर चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच में बिना निर्माण कार्य कराए ही 10 लाख 67 हजार 700 रुपये की शासकीय राशि का आहरण किए जाने का मामला सामने आया। संबंधितों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इस पर 8 सितंबर 2026 को पूर्व सरपंच श्री छोटेलाल कोल, क्षेत्रीय पीसीओ रमई कोल एवं सचिव भगवान सिंह के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। प्रकरण में आगामी सुनवाई की तिथि निर्धारित कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संघ प्रिय ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं वित्तीय अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय राशि के दुरुपयोग, अनियमितता अथवा गबन के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा रियायत नहीं बरती जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार वसूली के साथ-साथ दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

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