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हर बालक को भारत की मिट्टी और संस्कृति से जोड़ना ही शिक्षा का मूल उद्देश्य: डॉ. कृष्णगोपाल

जबलपुर। शिक्षा केवल परीक्षा में अंक पाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संस्कार, संवेदना और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने की सतत प्रक्रिया है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों का बोर्ड परिणाम 95 प्रतिशत से अधिक रहा है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी है जब विद्यार्थी भारत की मिट्टी और परंपरा के संस्कारों को आत्मसात कर एक जिम्मेदार नागरिक बने।

पंचकोषीय विकास और संस्कारवान शिक्षा पर बल

डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण निर्माण केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने से संभव नहीं है। उनके भीतर आध्यात्मिक चेतना और जीवन मूल्यों का जागरण जरूरी है। इसी उद्देश्य से विद्या भारती पंचकोषीय विकास की अवधारणा पर कार्य कर रही है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास समाहित है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए शिक्षा के इस अभियान को देश के सुदूर और उपेक्षित क्षेत्रों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

685 जिलों में 37 लाख विद्यार्थी ले रहे शिक्षा

बैठक में विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा ने कार्य विस्तार की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में संस्था का कार्य देश के 685 जिलों में फैला है। लगभग 24 हजार औपचारिक व अनौपचारिक विद्यालयों में 37 लाख छात्र अध्ययनरत हैं, जिन्हें 1.70 लाख से अधिक शिक्षक मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसके तहत 280 आवासीय और 1,041 जनजातीय विद्यालय भी संचालित हैं।

उन्होंने आगामी राष्ट्रीय आयोजनों की रूपरेखा रखते हुए बताया कि अखिल भारतीय खेलकूद समारोह गाजियाबाद (उ.प्र.), संस्कृति महोत्सव कुरुक्षेत्र (हरियाणा), विज्ञान मेला गोरखपुर (उ.प्र.), गणित मेला धनबाद (झारखंड) तथा टेकाथॉन-3 का आयोजन आईआईटी रुड़की (उत्तराखंड) में किया जाएगा।

डिजिटलीकरण और 75 वर्ष की यात्रा

सत्र की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे ने आधुनिक दौर में विद्यालयों के डिजिटलीकरण और तकनीक के समुचित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के 75 वर्ष पूर्ण होना ‘इंडिया से भारत की ओर’ बढ़ने का परिचायक है। बैठक का औपचारिक समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ। प्रादेशिक सचिव डॉ. सुधीर अग्रवाल के अनुसार, कार्यक्रम के उपरांत 14 सितंबर को मां नर्मदा को श्रद्धापूर्वक हलवा की कढ़ैया अर्पित की जाएगी।

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