प्याज के दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, खुदरा भाव 54 रुपये किलो के पार; नवंबर में राहत की उम्मीद

नई दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों के रसोई बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। देशभर में प्याज के खुदरा भाव लगातार ऊंचे बने हुए हैं। उपभोक्ता मामलों के आंकड़ों के अनुसार 21 सितंबर 2026 को प्याज की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत करीब 54 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। इससे पहले 18 सितंबर को यह औसत कीमत 53.86 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई थी, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 95 प्रतिशत अधिक थी।
थोक मंडियों में भी प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। 21 सितंबर को औसत थोक भाव 46.16 रुपये प्रति किलो यानी करीब 4,616 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा। उपलब्ध आंकड़ों में एक साल पहले का भाव 32.99 रुपये प्रति किलो यानी करीब 3,300 रुपये प्रति क्विंटल था। इस हिसाब से थोक भाव में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी बैठती है। इसलिए 135 प्रतिशत बढ़ोतरी का आंकड़ा इस तुलना से मेल नहीं खाता।
प्रमुख शहरों में प्याज के दाम आम उपभोक्ताओं को खास तौर पर परेशान कर रहे हैं। हाल के सरकारी आंकड़ों में दिल्ली में भाव करीब 53 रुपये, मुंबई में 58 रुपये, चेन्नई में 60 रुपये और रांची में 57 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। यानी कई बड़े शहरों में प्याज 55 से 60 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है।
नई फसल की आवक में देरी से बढ़ा दबाव
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे इस समय सबसे बड़ी वजह आपूर्ति का दबाव बताया जा रहा है। रबी सीजन की पुरानी प्याज की खेप अब धीरे-धीरे कम हो रही है, जबकि खरीफ की नई फसल की आवक अपेक्षा के अनुसार तेज नहीं हो पाई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार खरीफ प्याज की फसल करीब एक महीने तक पीछे चल रही है। इसके चलते मंडियों में ताजा प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है और भाव मजबूत बने हुए हैं।
महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम और फसल चक्र का असर भी बाजार पर पड़ा है। पुराना स्टॉक घटने और नई फसल आने में अंतर बढ़ने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ा है। यही वजह है कि सरकार के हस्तक्षेप के बावजूद खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें अभी पूरी तरह नीचे नहीं आ सकी हैं।
सरकार ने बफर स्टॉक बाजार में उतारा
कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है। बफर प्याज की बिक्री 35 रुपये प्रति किलो की नियंत्रित दर पर की जा रही है। इससे थोक बाजार में पिछले सप्ताह कुछ नरमी भी देखी गई और कुछ रिपोर्टों के अनुसार थोक कीमतों में चार से पांच रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई थी। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका असर अभी सीमित दिखाई दे रहा है।
कब मिलेगी महंगाई से राहत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर और अक्टूबर में प्याज के भाव पर दबाव बना रह सकता है। असली राहत नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने के बाद मिलने की उम्मीद है। हाल की बाजार रिपोर्टों में नवंबर से ताजा फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने पर कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई गई है। हालांकि, मौसम, उत्पादन और मंडियों में आवक की वास्तविक स्थिति के आधार पर कीमतों में बदलाव हो सकता है।
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए प्याज की महंगाई से तुरंत राहत की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। आने वाले कुछ सप्ताह मंडियों में नई फसल की आवक और सरकारी बफर स्टॉक की बिक्री की गति पर निर्भर करेंगे। इनके बढ़ने के साथ ही प्याज के दाम नीचे आने की उम्मीद है।













