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जस्टिस शर्मा के बेटे के ECI से जुड़े होने पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल

23 सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग, याचिकाकर्ता ने कहा- सुनवाई के दौरान पेश नहीं की गई थी यह जानकारी

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए नई अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता नमन शेरस्ट्रा ने अपनी अर्जी में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे के भारत निर्वाचन आयोग के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकील के रूप में पेश होने का मुद्दा उठाया है।

पांच सुनवाइयों में जानकारी सामने नहीं आने का दावा

अर्जी के अनुसार जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस मामले की पांच बार सुनवाई की थी। इनमें 6 मई, 7 मई, 14 मई, 27 मई और 30 जुलाई की सुनवाई शामिल है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन सुनवाइयों के दौरान जस्टिस शर्मा के बेटे के निर्वाचन आयोग से जुड़े होने की जानकारी पक्षकारों के सामने नहीं रखी गई। अर्जी में कहा गया है कि यह जानकारी 23 सितंबर के आदेश के दो दिन बाद सामने आई मीडिया रिपोर्टों से मिली।

23 सितंबर को दोनों न्यायाधीशों की अलग-अलग राय

23 सितंबर को पीठ ने 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजे जाने के सवाल पर अलग-अलग राय दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा था कि मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है, जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों का हवाला देते हुए कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ से सुनवाई की आवश्यकता बताई। इसके बाद मामले को आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने पर सहमति बनी।

अर्जी में वास्तविक पक्षपात का आरोप नहीं

नमन शेरस्ट्रा की अर्जी में स्पष्ट किया गया है कि जस्टिस शर्मा पर वास्तविक पक्षपात, व्यक्तिगत उद्देश्य या दुर्भावना का आरोप नहीं लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने न्यायिक निष्पक्षता की धारणा का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि यदि यह जानकारी पहले सामने होती तो वह जस्टिस शर्मा से अलग होने यानी रिक्यूजल का अनुरोध कर सकते थे। अर्जी में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 1997 में अपनाए गए ‘रेस्टेटमेंट ऑफ वैल्यूज ऑफ ज्यूडिशियल लाइफ’ का भी हवाला दिया गया है।

2024 से ECI के स्टैंडिंग काउंसल होने का दावा

याचिका में कहा गया है कि जस्टिस शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा को 10 जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में निर्वाचन आयोग के स्टैंडिंग काउंसल के रूप में नियुक्त किया गया है। यह जानकारी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सामने आने की रिपोर्ट है।

पहले भी दाखिल हो चुकी है याचिका

इस मामले में 29 सितंबर को कांग्रेस नेता और मूल याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से भी क्यूरेटिव याचिका दाखिल की गई थी। उसमें भी 23 सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए जस्टिस शर्मा के बेटे के निर्वाचन आयोग से पेशेवर संबंध का हवाला दिया गया है। दोनों अर्जियों में न्यायिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन दलीलों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

फिलहाल 23 सितंबर का आदेश और उसके बाद दाखिल याचिकाएं न्यायिक विचार के अधीन हैं। आगे की सुनवाई में ही स्पष्ट होगा कि अदालत इन अर्जियों पर क्या निर्णय लेती है।

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