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बजट की कमी का बहाना बनाकर ठेकेदार का भुगतान नहीं रोक सकती सरकार

हाईकोर्ट का अहम आदेश: मुरैना के पोंटून पुल के काम का 5 लाख रुपये बकाया छह प्रतिशत ब्याज सहित चार सप्ताह में देने के निर्देश

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में ठेकेदारों के भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई ठेकेदार सरकार की ओर से सौंपा गया काम पूरा कर देता है और विभाग उसकी देनदारी स्वीकार कर लेता है, तो केवल बजट उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर भुगतान को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मुरैना जिले में पोंटून पुल से जुड़े कार्य के एवज में बकाया 5 लाख रुपये छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ चार सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश दिया।

काम पूरा होने के बाद भी अटका भुगतान

मामला मुरैना जिले में पोंटून पुल के संयोजन, खोलने, स्थापित करने और रखरखाव से जुड़े कार्य का है। याचिकाकर्ता ठेकेदार का कहना था कि उसने विभाग की ओर से सौंपा गया कार्य पूरा कर दिया था और सक्षम अधिकारियों ने 5 लाख रुपये के भुगतान की देनदारी भी स्वीकार कर ली थी। इसके बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया।

सरकार ने बजट नहीं होने का दिया तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भुगतान के लिए आवश्यक बजट आवंटन की मांग कई बार भेजी गई, लेकिन राशि उपलब्ध नहीं हो सकी। रिकॉर्ड के अनुसार 11 दिसंबर 2024 को भी बजट आवंटन के लिए मांग भेजी गई थी। सरकार ने कहा कि बजट मद में राशि उपलब्ध होते ही भुगतान किया जाएगा।

आंतरिक व्यवस्था का बोझ ठेकेदार पर नहीं

जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा कि सरकारी काम पूरा करने वाले व्यक्ति को केवल बजट प्रावधान नहीं होने के कारण उसके वैध भुगतान से वंचित नहीं किया जा सकता। विभागीय बजट और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी कठिनाइयां सरकार की आंतरिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसका खामियाजा उस व्यक्ति को नहीं भुगतना चाहिए, जिसने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है और जिसकी देनदारी विभाग स्वीकार कर चुका है।

आठ प्रतिशत ब्याज की मांग, कोर्ट ने छह प्रतिशत दिया

ठेकेदार ने बकाया 5 लाख रुपये पर आठ प्रतिशत ब्याज की मांग की थी। हाईकोर्ट ने छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को चार सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा और याचिका का निपटारा कर दिया।

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