एसआईआर विवाद पर पूर्व जज जस्टिस नरीमन की चिंता, कहा- मताधिकार खतरे में, सुप्रीम कोर्ट जल्द करे हस्तक्षेप
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल, जस्टिस उज्जल भुइयां ने भी मतदाता अधिकारों को लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की धड़कन माने जाने वाला मताधिकार गंभीर खतरे में है और सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए।
जस्टिस नरीमन ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार प्रभावित होने के बावजूद इस प्रक्रिया पर पर्याप्त न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हुआ। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और संवैधानिक भूमिका सुनिश्चित करना जरूरी है।
सीईसी कानून पर जल्द फैसला देने की अपील
जस्टिस नरीमन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला करने की जरूरत बताई। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कहा कि ऐसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों और रिपोर्टों पर अंतिम स्थिति न्यायिक एवं आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
जस्टिस भुइयां ने भी मतदाता अधिकारों पर जताई चिंता
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने एसआईआर को लेकर कहा था कि यदि किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो जाते हैं तो ऐसी प्रक्रिया मनमानी मानी जा सकती है और यह संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत होगी। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
एसआईआर और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मामले फिलहाल न्यायिक विचार के दायरे में हैं। ऐसे में आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।













