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अकाउंटेंट की नौकरी पर एआई का असर, नई स्टडी ने पेशे के भविष्य को लेकर बढ़ाई चिंता

एक परीक्षण में एआई मॉडल ने अनुभवी अकाउंटेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इससे पूरी नौकरी खत्म होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब केवल चैट, कंटेंट और तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है। तकनीक तेजी से ऐसे पेशेवर कामों में भी अपनी क्षमता दिखा रही है, जिन्हें अब तक मुख्य रूप से मानव विशेषज्ञता से जोड़ा जाता था। अकाउंटिंग भी इसी बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक नई स्टडी में कुछ निर्धारित अकाउंटिंग कार्यों में एआई मॉडल्स ने अनुभवी मानव अकाउंटेंट्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे अकाउंटिंग पेशे के भविष्य और रोजगार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मानव अकाउंटेंट्स की औसत सटीकता 37 प्रतिशत

Mercor की ‘Human Baselines for Benchmarks: AI Now Outperforms Junior Accountants’ नामक स्टडी में 12 लाइसेंस प्राप्त सीपीए अकाउंटेंट्स और विभिन्न एआई मॉडल्स के प्रदर्शन की तुलना की गई। प्रतिभागियों के पास औसतन 5.5 वर्ष का अकाउंटिंग अनुभव था।

परीक्षण में वास्तविक कंपनियों के रिकॉर्ड पर आधारित महीने के अंत से जुड़े अकाउंटिंग कार्य दिए गए। इनमें जरूरी जानकारी तलाशना, आंकड़ों की पहचान, गणना और निर्धारित प्रारूप में परिणाम तैयार करना शामिल था। मानव प्रतिभागियों की औसत सटीकता 37 प्रतिशत रही, जबकि अलग-अलग प्रतिभागियों के प्रदर्शन में काफी अंतर था। अधिकांश को कार्य पूरा करने में 30 से 180 मिनट तक लगे।

इसके मुकाबले अध्ययन में Claude Opus 5 ने 20 प्रयासों में 100 प्रतिशत सटीकता हासिल की और प्रत्येक कार्य को 10 मिनट से कम समय में पूरा किया।

लागत में भी बड़ा अंतर

स्टडी में कार्य पूरा करने की लागत की तुलना भी की गई। शोधकर्ताओं के अनुमान के अनुसार एक मानव अकाउंटेंट के लिए एक बेंचमार्क कार्य की औसत लागत करीब 10.35 डॉलर थी, जबकि Claude Opus 5 से उसी कार्य को कराने की अनुमानित लागत करीब 0.21 डॉलर रही।

यह अंतर कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर ऐसे कामों में जो दोहराए जाने वाले और स्पष्ट नियमों पर आधारित होते हैं।

18 महीने में तेजी से बदली एआई की क्षमता

अध्ययन में एआई की क्षमता में तेजी से हुए सुधार को भी रेखांकित किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार करीब 18 महीने पहले तक सबसे बेहतर एआई मॉडल भी इस परीक्षण में मानव अकाउंटेंट्स के 37 प्रतिशत औसत प्रदर्शन को पार नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद कुछ नए मॉडल मानव औसत से आगे निकले और नवीनतम मॉडलों का प्रदर्शन काफी बेहतर हुआ।

हालांकि, स्टडी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि एआई जल्द ही अकाउंटेंट्स की पूरी नौकरियां खत्म कर देगा।

अकाउंटिंग सिर्फ आंकड़ों की गणना नहीं

वास्तविक दुनिया में अकाउंटेंट का काम केवल दस्तावेजों से आंकड़े निकालना या गणना करना नहीं होता। क्लाइंट से बातचीत, समस्या की पहचान, टैक्स और वित्तीय मामलों की समझ, प्रबंधन को सलाह देना, जोखिम का आकलन और असामान्य परिस्थितियों में निर्णय लेना भी पेशे का हिस्सा है।

इन मानवीय क्षमताओं का परीक्षण उक्त अध्ययन में नहीं किया गया। इसलिए अध्ययन के नतीजों को अकाउंटेंट के पूरे पेशे के प्रदर्शन से जोड़ना उचित नहीं होगा।

बदल सकती है अकाउंटेंट की भूमिका

फिर भी एआई का बढ़ता प्रभाव अकाउंटिंग के काम करने के तरीके को बदल सकता है। डेटा एंट्री, दस्तावेजों से जानकारी निकालना, नियमित मिलान, रिपोर्ट तैयार करना और नियम आधारित गणना जैसे कार्य भविष्य में ज्यादा स्वचालित हो सकते हैं।

ऐसे में अकाउंटेंट की भूमिका नियमित काम करने वाले कर्मचारी से बढ़कर वित्तीय विश्लेषण, रणनीतिक सलाह, क्लाइंट प्रबंधन, जोखिम मूल्यांकन और कारोबारी निर्णयों में विशेषज्ञ की हो सकती है।

‘एआई बनाम अकाउंटेंट’ नहीं, ‘एआई के साथ अकाउंटेंट’

भविष्य में तस्वीर एआई और अकाउंटेंट के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा के बजाय दोनों के सहयोग की हो सकती है। एआई घंटों लगने वाले नियमित कार्य कुछ मिनटों में पूरा कर सकता है, जिससे अकाउंटेंट अधिक जटिल और निर्णय आधारित काम पर ध्यान दे सकेंगे।

हालांकि एआई के परिणामों की मानवीय जांच जरूरी रहेगी। नियंत्रित परीक्षण में 100 प्रतिशत सटीकता प्रभावशाली है, लेकिन वास्तविक वित्तीय मामलों में गलत या अधूरे दस्तावेज, अस्पष्ट निर्देश और असामान्य परिस्थितियां परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए आने वाले समय में अकाउंटेंट्स के लिए पारंपरिक अकाउंटिंग ज्ञान के साथ एआई टूल्स, डेटा विश्लेषण, ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम की समझ महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही संवाद, समस्या समाधान और आलोचनात्मक सोच जैसी मानवीय क्षमताओं की भूमिका भी बनी रहेगी।

कुल मिलाकर, एआई फिलहाल अकाउंटेंट की नौकरी खत्म करने के बजाय पेशे के स्वरूप में बदलाव का संकेत दे रहा है। चुनौती इस बात की होगी कि अकाउंटिंग पेशेवर बदलती तकनीक के साथ कितनी तेजी से अपने कौशल को विकसित करते हैं।

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