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हैवी ब्लास्टिंग की तैयारी से दहशत में कोहराखोह के ग्रामीण

100 मीटर के दायरे में दर्जनों मकान, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए चट्टानों में किए जा रहे ड्रिलिंग कार्य से बढ़ी चिंता

सिंगरौली। देवसर क्षेत्र के ग्राम पंचायत जोगनी अंतर्गत कोहराखोह में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए चट्टानों में ब्लास्टिंग की तैयारी किए जाने से आसपास रहने वाले ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा चट्टानों में ब्लास्टिंग के लिए होल किए जा रहे हैं। वहीं, ब्लास्टिंग स्थल के आसपास बड़ी संख्या में परिवार अपने मकानों में रह रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित ब्लास्टिंग स्थल से करीब 100 मीटर के दायरे में दर्जनों मकान स्थित हैं। ऐसे में हैवी ब्लास्टिंग होने पर तेज कंपन, मकानों में दरार पड़ने अथवा अन्य नुकसान की आशंका को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। लोगों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर आबादी के नजदीक ब्लास्टिंग कार्य में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।

10 वर्षों में कई बार ब्लास्टिंग का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि कोहराखोह क्षेत्र में पिछले करीब 10 वर्षों के दौरान कई बार हैवी ब्लास्टिंग की जा चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में हुई ब्लास्टिंग के दौरान कुछ मकानों को नुकसान पहुंचा था, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। हालांकि, इन दावों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।

हैवी ब्लास्टिंग के बजाय नियंत्रित ब्लास्टिंग की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन आबादी के इतने करीब निर्माण कार्य होने के कारण लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि चट्टानों को हटाने के लिए ब्लास्टिंग अपरिहार्य है तो हैवी ब्लास्टिंग के बजाय नियंत्रित और छोटे स्तर की ब्लास्टिंग की जाए।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग शुरू करने से पहले आसपास स्थित मकानों का सर्वे कराने, भवनों की मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

पूर्व नुकसान का सर्वे कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूर्व में हुई ब्लास्टिंग से मकानों को हुए कथित नुकसान का भी सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में नुकसान की पुष्टि होती है तो पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही आगामी ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्माण कार्य के साथ-साथ ग्रामीणों की जान-माल और संपत्ति की सुरक्षा भी बनी रहे।

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