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देवसर मंदिर ट्रस्ट और पूर्व पटवारी सेवा समाप्ति मामले में हाईकोर्ट के निर्देश

एक मामले में कलेक्टर को छह सप्ताह में सुनवाई का आदेश, दूसरे में शासन से चार सप्ताह में जवाब तलब

सिंगरौली। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ में सिंगरौली से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। एक मामले में देवसर स्थित शिव मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और करीब 10 वर्षों से खातों का ऑडिट नहीं होने की शिकायत पर कलेक्टर-सह-रजिस्ट्रार को सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। वहीं दूसरे मामले में पूर्व पटवारी हरिशंकर शुक्ल की सेवा समाप्ति से जुड़े प्रकरण में राज्य शासन एवं संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

देवसर मंदिर ट्रस्ट मामले में छह सप्ताह में फैसला

स्थानीय पत्रकार अनुरोध शुक्ल द्वारा दायर याचिका में देवसर स्थित शिव मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पिछले 10 वर्षों से खातों का ऑडिट नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवम शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। 20 अगस्त 2026 के शिकायत पत्र का हवाला देते हुए बताया गया कि मंदिर का संचालन सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में होता है और उस पर मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951 के प्रावधान लागू होते हैं।

राज्य शासन की ओर से बताया गया कि अधिनियम के तहत जांच, कार्रवाई और सुधारात्मक कदम उठाने का अधिकार कलेक्टर-सह-रजिस्ट्रार के क्षेत्राधिकार में आता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर-सह-रजिस्ट्रार सिंगरौली को याचिकाकर्ता और संबंधित ट्रस्टियों को सुनवाई का अवसर देते हुए छह सप्ताह के भीतर शिकायत पर नियमानुसार निर्णय लेने तथा याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए। अदालत ने फिलहाल आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।

पूर्व पटवारी की सेवा समाप्ति मामले में नोटिस

दूसरे मामले में न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने रिट याचिका क्रमांक 38075/2026, हरिशंकर शुक्ल विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य की सुनवाई करते हुए राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवम शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा।

हरिशंकर शुक्ल पूर्व में तहसील देवसर के हल्का पुरैल में पटवारी पद पर पदस्थ रहे हैं। याचिका में 6 अगस्त 2011 के सेवा समाप्ति आदेश के साथ 13 अप्रैल 2023 के अपीलीय आदेश और 6 अक्टूबर 2025 के पुनरीक्षण आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि राजस्व अभिलेखों में कथित छेड़छाड़ केवल पटवारी के पास उपलब्ध अभिलेखों तक सीमित नहीं थी, बल्कि आरटीआई के माध्यम से जिला रिकॉर्ड रूम से प्राप्त प्रतियों में भी कथित बदलाव सामने आए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित अभिलेखों तक पहुंच और उनमें हुए कथित बदलाव की स्वतंत्र जांच नहीं की गई।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मामला करीब 29 गांवों के राजस्व अभिलेखों से जुड़ा था, लेकिन जिम्मेदारी केवल दो पटवारियों पर तय कर दी गई। याचिकाकर्ता ने अपने जुलाई 2010 में कार्यभार संभालने और विवादित प्रविष्टियों के उससे पूर्व के अभिलेखों में मौजूद होने का भी हवाला दिया है।

हरिशंकर शुक्ल ने विवादित आदेशों को निरस्त कर सेवा की निरंतरता, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाने की मांग की है। फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

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