बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्य प्रदेश

फर्जी डीएड-बीएड डिग्री से 20 साल नौकरी, 51 शिक्षकों पर एफआईआर के निर्देश

सांवेर में 2006-07 की संविदा शिक्षक भर्ती में सामने आया मामला, वेतन वसूली की तैयारी; 23 अन्य शिक्षकों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में

इंदौर। जिले के सांवेर विकासखंड में वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शाला शिक्षक भर्ती में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। जांच में 51 शिक्षकों की डीएड और बीएड की डिग्री व अंकसूचियां संदिग्ध अथवा फर्जी पाए जाने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन की गणना कर वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

मामले की जांच वर्ष 2021 में मिली शिकायत के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद शिक्षकों द्वारा नियुक्ति के समय प्रस्तुत डीएड और बीएड की अंकसूचियों का संबंधित संस्थाओं से सत्यापन कराया गया। वर्ष 2022 से 2023 के बीच हुए सत्यापन में कई अंकसूचियों के माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर अलग-अलग परीक्षार्थियों के नाम दर्ज पाए गए।

जांच के बाद चार प्राचार्यों की समिति गठित की गई थी। समिति ने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद भोपाल एसटीएफ ने भी मामले की जांच की और संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों को फर्जी पाए जाने की बात सामने आई। जांच के दायरे में सांवेर सहित आसपास के कई शासकीय विद्यालयों के संकुल शामिल रहे।

बताया गया कि समिति की रिपोर्ट के बाद संबंधित संकुल प्राचार्यों को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इस दौरान संबंधित शिक्षक सरकारी सेवा में बने रहे। अब वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने संकुल प्राचार्यों और खंड शिक्षा अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

जांच में 51 शिक्षकों के डीएड दस्तावेज फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है, जबकि करीब 20 शिक्षकों के पास बीएड की डिग्री भी होने की जानकारी है। इसके अलावा 23 अन्य शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच जारी बताई जा रही है। लोकायुक्त द्वारा कुल 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड भी तलब किए जाने की जानकारी सामने आई है।

शिक्षा विभाग अब संबंधित शिक्षकों की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन की गणना कर रहा है। शुरुआती अनुमान के अनुसार वसूली की राशि करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। हालांकि अंतिम राशि दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

Author

Related Articles

Back to top button