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18 साल से सीईओ कार्यालय में स्टेनो का दायित्व निभा रहे इंद्रभान बुनकर की पदस्थापना पर सवाल

नियुक्ति आदेश में ‘भृत्य’ पद का उल्लेख, स्टेनो का दायित्व सौंपने वाले आदेश और योग्यता संबंधी दस्तावेजों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

सिंगरौली। जिला पंचायत सिंगरौली में कर्मचारी इंद्रभान बुनकर की पदस्थापना और लंबे समय से निभाए जा रहे दायित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2006 में उनकी नियुक्ति ‘भृत्य’ यानी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर की गई थी। वहीं, वर्तमान में उनके जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय में स्टेनो का कार्य करने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि उन्हें यह दायित्व किस आदेश और किस प्रक्रिया के तहत सौंपा गया।

वर्ष 2006 के नियुक्ति आदेश में भृत्य पद का उल्लेख
प्राप्त दस्तावेज के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्रों के अनुपालन में विशेष भर्ती अभियान के तहत जिला पंचायत सीधी की सामान्य प्रशासन स्थायी समिति की बैठक में 7 दिसंबर 2006 को अनुमोदन के बाद इंद्रभान बुनकर, पिता रामगोपाल बुनकर, निवासी सोहावल तरहती, जिला सतना को भृत्य के पद पर अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक नियुक्त किया गया था। आदेश में वेतनमान 2550-55-2660-60-3200 और दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि का उल्लेख भी बताया गया है।
वर्ष 2008 में सिंगरौली जिला अलग होने के बाद उनकी पदस्थापना यहां होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सीईओ कार्यालय में स्टेनो का दायित्व कब और किस प्रशासनिक आदेश के तहत सौंपा गया, यह स्पष्ट नहीं है।

योग्यता और पदस्थापना आदेश पर उठे सवाल
मामले में प्रमुख सवाल यह है कि क्या इंद्रभान बुनकर को स्टेनो के पद पर विधिवत नियुक्ति या पदोन्नति मिली थी, अथवा उन्हें केवल कार्यालयीन कार्य-विभाजन के तहत यह जिम्मेदारी दी गई थी? यदि स्टेनोग्राफी और टाइपिंग संबंधी योग्यता निर्धारित थी, तो क्या संबंधित प्रमाण-पत्र विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं? इन सवालों का जवाब नियुक्ति, पदस्थापना और योग्यता से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
करीब 18 वर्षों से एक ही कार्यालय में लगातार कार्य करने के संबंध में भी विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस अवधि में उनके पद, कार्य और पदस्थापना को लेकर समय-समय पर क्या आदेश जारी हुए और सक्षम अधिकारियों ने किन नियमों के तहत जिम्मेदारियां तय कीं।

राशि लेने के आरोपों की पुष्टि भी जरूरी
संबंधित कर्मचारी पर मनमानी राशि लेने के आरोप लगाए जाने की बातें भी सामने आई हैं। लोकायुक्त में शिकायत किए जाने की चर्चा है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि कोई शिकायत दर्ज हुई है, तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे प्रशासन
पूरे मामले में जिला पंचायत प्रशासन से वर्ष 2006 के मूल नियुक्ति आदेश, सिंगरौली में पदस्थापना आदेश, स्टेनो का दायित्व सौंपने संबंधी आदेश, योग्यता प्रमाण-पत्र तथा पदोन्नति या चयन से जुड़े रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा है।
मामला केवल किसी कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही स्थान पर कार्य करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मूल नियुक्ति पद और वर्तमान में निभाए जा रहे दायित्व के बीच प्रशासनिक संबंध को स्पष्ट करने का भी है। यदि संबंधित कर्मचारी को नियमानुसार स्टेनो का कार्य सौंपा गया है, तो उसके समर्थन में जारी आदेश और दस्तावेज सामने आने चाहिए। वहीं, यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

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