एनटीपीसी विंध्याचल प्रबंधन व ऐश ट्रांसपोर्टरों की मनमानी से उजड़ रही सांसें: सड़कों पर जहरीली राखड़ का साम्राज्य, घरों में जम रहीं परतें
विंध्यनगर, गहिलगढ़, तेलगवां और गनियारी के रहवासी गंभीर बीमारियों की चपेट में; कलेक्टर के आदेशों को धता बताकर बिना ढंके दौड़ रहे ओवरलोड वाहन

सिंगरौली -ऊर्जाधानी में औद्योगिक विकास की आड़ में आम नागरिकों की सेहत से हो रहा खिलवाड़ अब चरम पर पहुंच चुका है। एनटीपीसी विंध्याचल प्रबंधन और फ्लाई ऐश परिवहन में लगे ट्रांसपोर्टरों की कथित सांठगांठ तथा खुली मनमानी का खामियाजा क्षेत्र की जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। एनटीपीसी विंध्याचल का शाहपुर ऐश डैम आज आसपास के ग्रामीणों और रहवासियों के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। एक ओर जहां ऐश डैम का जहरीला और दूषित पानी रिसकर किसानों के उपजाऊ खेतों में समा रहा है, जिससे फसलें पूरी तरह तबाह हो रही हैं; वहीं दूसरी ओर डैम से निकलने वाले राखड़ लदे अनियंत्रित वाहन समूचे अंचल को प्रदूषण के गहरे गर्त में धकेल रहे हैं।
मुनाफे के फेर में कलेक्टर के आदेश रद्दी, प्रबंधन की मिलीभगत उजागर
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि एनटीपीसी प्रबंधन से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत के चलते नियमों को ताक पर रखकर राखड़ का परिवहन किया जा रहा है। वाहनों को तिरपाल से सुरक्षित कवर करने में लगने वाले खर्च को बचाने के चक्कर में परिवहनकर्ता खुलेआम राखड़ ढो रहे हैं। नियमों के अनुसार डैम से राखड़ लोड कर कोई भी वाहन बिना पूरी तरह ढंके बाहर नहीं निकल सकता, और इसकी सीधी निगरानी की जिम्मेदारी एनटीपीसी प्रबंधन की है। परंतु प्रबंधन की अनदेखी और लापरवाही के कारण सैकड़ों हाइवा, ट्रेलर और ट्रक ओवरलोड राखड़ भरकर बेधड़क सड़कों पर निकल रहे हैं। कलेक्टर द्वारा जारी किए गए स्पष्ट निर्देशों—कि वाहनों को ओवरलोड न किया जाए और उन्हें पूरी तरह से तिरपाल से ढंका जाए—की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई वाहनों में ऊपर से मात्र खानापूर्ति के लिए तिरपाल डाली जाती है, लेकिन नीचे के खुले गैप से सड़क पर लगातार राखड़ बिखरती रहती है।
हवा में तैरता जहर: विंध्यनगर, गहिलगढ़, तेलगवां के घरों में जमी राखड़ की चादर
सड़कों पर ऐश परिवहन के दौरान गिरने वाली यह बारीक और जहरीली राखड़ जरा सी हवा चलते ही उड़कर सीधे आम जनता के घरों, दुकानों और सांसों में समा रही है। विंध्यनगर, सेमराबाबा, गहिलगढ़, तेलगवां और गनियारी के रहवासियों का अपने ही घरों में रहना दूभर हो गया है। सुबह उठते ही लोगों के घरों के भीतर से लेकर बाहर तक राखड़ की मोटी चादर जमी मिलती है। लगातार राखड़ के संपर्क में रहने के कारण मासूम बच्चों और बुजुर्गों में सांस, दमा, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने खुले में हो रहे इस अवैध परिवहन को लेकर कई बार एनटीपीसी प्रबंधन से लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन गैर-जिम्मेदार प्रबंधन हर बार इन जनशिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल देता है।
कागजों पर सिमटा पानी का छिड़काव, सड़कों पर लग रहा भीषण जाम
शाहपुर ऐश डैम से राखड़ लोड करने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में भारी वाहन गुजरते हैं, जिसके कारण प्रमुख मार्गों पर दिन-रात भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। सार्वजनिक मार्गों पर उड़ने वाली राखड़ को दबाने के लिए नियमित पानी के छिड़काव और सड़कों की सफाई की पूरी जिम्मेदारी एनटीपीसी प्रबंधन की बनती है। हकीकत यह है कि एनटीपीसी के अधिकारी केवल कागजों में पानी का छिड़काव और सफाई दिखाकर राशि का आहरण कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सड़कों पर पानी का छिड़काव न होने से पूरे दिन धूल का गुबार छाया रहता है, जिससे दोपहिया चालकों और राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। यदि एनटीपीसी प्रबंधन ने जल्द ही अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थिति जनआंदोलन का रूप ले सकती है।
क्या कहते हैं पीड़ित रहवासी:
सड़क पर गिरने वाली राखड़ पर लगे तत्काल रोक:
“राखड़ लोड वाहनों से गिरने वाली ऐश जरा सी हवा चलने पर उड़कर सीधे हमारे घरों के अंदर पहुंच जाती है। सुबह उठते ही घर के अंदर से बाहर तक राखड़ की मोटी परत जमी रहती है। एनटीपीसी प्रबंधन को सड़क पर गिरने वाली राखड़ पर फौरन रोक लगानी चाहिए।”
— विकास दुबे, रहवासी, गहिलगढ़
धूल से बुजुर्ग और बच्चे आ रहे दमे की चपेट में:”ट्रांसपोर्टर नियमों को धता बताकर ओवरलोड माल लेकर निकलते हैं और वाहनों को ढंका तक नहीं जाता। जहरीली राखड़ दिनभर हवा में उड़ती रहती है, जिससे हमारे घरों के बुजुर्ग और बच्चे सांस व दमा जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।”
— शिवदयाल शाह, रहवासी, विंध्यनगर
कंपनी प्रबंधन हमारी जान से कर रहा खिलवाड़:”जिन मार्गों से राखड़ लदे वाहन गुजरते हैं, वहां हर समय जाम लगा रहता है। साफ-सफाई तो दूर की बात, सड़क पर पानी का छिड़काव तक नहीं कराया जाता। ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी प्रबंधन मिलकर सीधे तौर पर हमारी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।”
— अनुज मिश्रा, रहवासी, तेलगवां













