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पावसुन वाशरी के बाहर भस्सी के स्टॉक से कोयले की गुणवत्ता पर उठे सवाल

पावसुन से प्रयागराज पावर प्लांट तक कोयला आपूर्ति की चर्चा, खदान से प्लांट तक चार स्तर पर सैंपलिंग कराने की उठी मांग

सिंगरौली। बरगवां थाना क्षेत्र के भलुगढ़ स्थित पावसुन इंडस्ट्री की कोल वाशरी एक बार फिर स्थानीय चर्चाओं के केंद्र में है। वाशरी परिसर को चारों तरफ से ढंककर रखे जाने और बाहर बड़ी मात्रा में भस्सी यानी स्टोन डस्ट का स्टॉक दिखाई देने के बाद कोयले की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि रात के समय पावर प्लांटों को भेजे जाने वाले कोयले में भस्सी और रिजेक्ट सामग्री मिलाई जा सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
पावसुन इंडस्ट्री लिमिटेड की वाशरी से रेलवे रैक के माध्यम से विभिन्न पावर कंपनियों को कोयले की आपूर्ति किए जाने की चर्चा है। प्रयागराज पावर प्लांट तक भी यहां से कोयला भेजे जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में वाशरी के बाहर जमा स्टोन डस्ट के स्रोत, मात्रा, उपयोग और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

वाशरी ढकी क्यों, भस्सी के स्टॉक का हिसाब क्या
वाशरी परिसर को चारों तरफ से ढंककर रखने और बाहर भस्सी का बड़ा स्टॉक होने को लेकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि रात के समय कोयले की लोडिंग के दौरान संदिग्ध गतिविधियां हो सकती हैं। इन दावों की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित विभागों द्वारा स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और रेलवे रैक में लोडिंग की प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए।

खदान से पावर प्लांट तक चार चरणों में हो सैंपलिंग
कोयले की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष जवाब पाने के लिए खदान से लेकर पावर प्लांट तक चार चरणों में स्वतंत्र सैंपलिंग कराने की मांग महत्वपूर्ण है। पहला नमूना खदान से निकलने वाले कोयले का, दूसरा वाशरी पहुंचने पर, तीसरा रेलवे रैक में लोडिंग के बाद और चौथा पावर प्लांट में अनलोडिंग के समय लिया जाए।
सभी नमूनों की अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराकर राख की मात्रा, गुणवत्ता और अन्य निर्धारित मानकों की तुलना की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आपूर्ति की अलग-अलग अवस्थाओं में कोयले की गुणवत्ता में कोई असामान्य बदलाव हुआ है या नहीं।

संयुक्त जांच से सामने आ सकता है सच
प्रशासन, संबंधित कोयला कंपनी, रेलवे और पावर प्लांट प्रबंधन की संयुक्त निगरानी में जांच कराए जाने की जरूरत बताई जा रही है। सैंपलिंग की वीडियोग्राफी, स्टॉक का भौतिक सत्यापन और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान जांच को पारदर्शी बना सकता है।
फिलहाल पावसुन वाशरी में कथित मिलावट को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभागों की निष्पक्ष जांच और वाशरी प्रबंधन का पक्ष सामने आना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और कोयले की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सके।

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