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श्रवण कुमार के विलाप से शिव-पार्वती विवाह तक, हिंडालको महान की रामलीला में जीवंत हुई रामायण

करुण प्रसंगों ने नम कीं आंखें, राम-सीता जन्मोत्सव ने माहौल को बनाया भक्तिमय; विधायक राजेंद्र मेश्राम भी पहुंचे

सिंगरौली। कहीं श्रवण कुमार के माता-पिता का हृदयविदारक विलाप, तो कहीं भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का उल्लास। कहीं राजा दशरथ की अनजाने में हुई भूल का मार्मिक चित्रण, तो कहीं भगवान राम और माता सीता के जन्मोत्सव की खुशियां। हिंडालको महान में कर्मचारियों और उनके परिवारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला में भक्ति, भावनाओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का कलाकारों ने प्रभावशाली संवादों, सजीव अभिनय और पात्रों के अनुरूप भाव-भंगिमाओं के साथ मंचन किया। रामायण की कथा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, दर्शक कभी भावुक हुए तो कभी भक्तिरस में डूब गए। कर्मचारियों और उनके परिजनों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को पारिवारिक और सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

श्रवण कुमार प्रसंग ने दर्शकों को किया भावुक

रामलीला का सबसे मार्मिक दृश्य राजा दशरथ द्वारा शब्दभेदी बाण चलाए जाने और उसकी चपेट में आकर श्रवण कुमार के घायल होने का रहा। अपने माता-पिता की सेवा में समर्पित श्रवण कुमार की पीड़ा और उनके माता-पिता का करुण विलाप देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद राजा दशरथ को दिया गया श्राप कथा को एक गंभीर मोड़ देता है।

इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने माता-पिता के प्रति सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया। साथ ही यह भी दर्शाया कि अनजाने में हुई भूल के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस पौराणिक प्रसंग को मंच पर जीवंत कर दिया।

शिव-पार्वती विवाह में दिखा भक्ति और उल्लास का संगम

रामलीला का एक प्रमुख आकर्षण भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग रहा। हिंडालको महान के मानव संसाधन प्रमुख डॉ. विवेकानन्द मिश्रा ने भगवान शिव की भूमिका निभाई, जबकि उनकी धर्मपत्नी श्रद्धा मिश्रा माता पार्वती के रूप में नजर आईं। दोनों की प्रस्तुति ने विवाह प्रसंग को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

मंच पर विवाह से जुड़े दृश्यों के दौरान वातावरण भक्तिमय हो गया। कलाकारों के अभिनय और प्रसंग की प्रस्तुति ने दर्शकों को धार्मिक आस्था से जोड़ दिया। इस दृश्य ने रामलीला में उत्साह और उल्लास का रंग भर दिया।

राम-सीता जन्मोत्सव से गूंजा भक्तिरस

श्रवण कुमार प्रसंग के बाद भगवान राम और माता सीता के जन्मोत्सव से जुड़े दृश्यों का मंचन किया गया। इन प्रसंगों ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाते हुए आयोजन में भक्ति और उत्साह का संचार किया। कलाकारों ने संवादों और भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से पौराणिक घटनाओं को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।

रामलीला में हिंडालको महान के अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों ने विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन में कर्मचारियों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि कार्यस्थल से जुड़ा परिवार सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत कर सकता है।

विधायक राजेंद्र मेश्राम ने भी देखा मंचन

हिंडालको महान में आयोजित रामलीला देखने क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र मेश्राम भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उन्होंने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। विधायक और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से कार्यक्रम में क्षेत्रीय सहभागिता भी देखने को मिली।

भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का संदेश

हिंडालको महान की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन रही है। रामायण के प्रसंगों के जरिए सत्य, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसे मूल्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

कर्मचारियों और उनके परिजनों द्वारा स्वयं पात्रों की भूमिका निभाना आयोजन को विशेष बनाता है। इस तरह रामलीला मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और आदर्शों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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