चौथी कक्षा में कलेक्टर से मिला पुरस्कार, उसी दिन देख लिया आईएएस बनने का सपना
सिंगरौली के नवागत कलेक्टर अंकित अस्थाना की प्रेरक कहानी, बचपन के संकल्प को 2014 में किया पूरा; मुरैना में शांतिपूर्ण चुनाव कराने पर राज्यपाल के हाथों मिला सम्मान

सिंगरौली। बचपन में मिला एक छोटा-सा सम्मान कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बन जाता है। राजगढ़ जिले के एक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले अंकित अस्थाना ने जब पहली बार जिले के कलेक्टर के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया, तब उन्हें यह भी नहीं पता था कि कलेक्टर कौन होता है और उसके पास कितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है। घर पहुंचकर जब उन्होंने माता-पिता से उस अधिकारी के बारे में पूछा, तो उन्हें पता चला कि कलेक्टर जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी होता है। बस, उसी दिन उनके मन में एक सपना जन्मा—एक दिन उन्हें भी कलेक्टर बनना है। समय के साथ यह सपना उनके साथ चलता रहा और मेहनत, अनुशासन तथा धैर्य के बल पर उन्होंने इसे साकार कर दिखाया। आज अंकित अस्थाना सिंगरौली जिले के नवागत कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बचपन के सपने को बनाया जीवन का लक्ष्य
अपने शुरुआती जीवन और प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने के सफर के बारे में चर्चा करते हुए कलेक्टर अंकित अस्थाना ने बताया कि राजगढ़ जिले में पढ़ाई के दौरान स्कूल में खेलकूद और क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित हुई थीं। प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए जिले के कलेक्टर स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने अन्य विद्यार्थियों के साथ अंकित को भी पुरस्कार दिया।
अंकित के मन में उस समय यह सवाल उठा कि कद-काठी में सामान्य दिखने वाले उस व्यक्ति के सामने सभी लोग इतने अनुशासित होकर क्यों खड़े थे। घर पहुंचने पर माता-पिता ने बताया कि वह जिले के सबसे बड़े अधिकारी हैं। इस जानकारी ने बालमन पर गहरी छाप छोड़ी और उन्होंने भी कलेक्टर बनने का निश्चय कर लिया। अस्थाना बताते हैं कि बचपन में देखा गया यह सपना उम्र बढ़ने के साथ कभी धुंधला नहीं पड़ा और आखिरकार 2014 में उनकी मेहनत सफल हुई।
सुप्रीम कोर्ट की नौकरी छोड़ की यूपीएससी की तैयारी
अंकित अस्थाना की प्रारंभिक शिक्षा राजगढ़ में सातवीं कक्षा तक हुई। इसके बाद पिता का स्थानांतरण भोपाल होने पर उन्होंने शारदा विद्या मंदिर से 8वीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। आगे उन्होंने भोपाल के नेशनल लॉ कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। स्नातक के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ज्यूडिशियल क्लर्क के रूप में काम करने का अवसर मिला। हालांकि, बचपन से संजोया आईएएस बनने का सपना उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण था। उन्होंने नौकरी छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
1 सितंबर 2014 को चयन के बाद उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय में करीब 3 महीने तक असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में कार्य किया। वर्ष 2016 में शिवपुरी जिले के कोहरी में एसडीएम के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग हुई। वर्ष 2017 में उन्होंने शिवपुरी जिले के करैरा में भी एसडीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद बड़वानी, उमरिया और उज्जैन में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया।
मुरैना में शांतिपूर्ण चुनाव कराना रही बड़ी उपलब्धि
वर्ष 2022 में अंकित अस्थाना को मुरैना जिले के कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। वर्ष 2025 तक के उनके कार्यकाल में चुनाव प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती रहा। उनके अनुसार, मुरैना जैसे संवेदनशील जिले में 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना बड़ी जिम्मेदारी थी।जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, दोनों चुनाव बिना किसी बड़ी हिंसक घटना के संपन्न हुए। इस उपलब्धि के लिए निर्वाचन आयोग ने उनकी सराहना की और मध्य प्रदेश के राज्यपाल के हाथों उन्हें सर्वश्रेष्ठ जिला निर्वाचन अधिकारी के सम्मान से नवाजा गया।
मुरैना के बाद वह मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम में अतिरिक्त प्रबंध संचालक, सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव और कर्मचारी चयन मंडल में प्रभारी संचालक जैसे पदों पर कार्यरत रहे। इसके बाद उन्हें सिंगरौली जिले की कमान सौंपी गई।
राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रहे हैं अस्थाना
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अंकित अस्थाना की खेलों में भी गहरी रुचि रही है। वह राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके हैं। उन्हें क्रिकेट और टेनिस भी पसंद हैं। व्यस्त प्रशासनिक जीवन के कारण क्रिकेट और बास्केटबॉल के लिए समय कम मिल पाता है, लेकिन वह अब भी टेनिस खेलते हैं। खाली समय में फिल्में देखना और कार चलाना उनके पसंदीदा शौक हैं।
परिवार में डॉक्टर और न्यायिक अधिकारी
अंकित अस्थाना का परिवार भी अलग-अलग महत्वपूर्ण पेशों से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ. ललित बिहारी अस्थाना नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ रहे हैं तथा मध्य प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में उप संचालक के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी माता डॉ. सुधा अस्थाना स्त्री रोग विशेषज्ञ रही हैं और भोपाल के जय प्रकाश अस्पताल से सेवानिवृत्त हुई हैं। उनकी पत्नी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। छोटा भाई रायसेन जिले में न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत है। उनका एक बेटा है, जो दिल्ली पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ता है।
युवाओं को दिया मेहनत और धैर्य का संदेश
यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कलेक्टर अस्थाना ने कहा कि किसी लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य जरूरी है। अधूरे मन से की गई तैयारी से सफलता हासिल करना कठिन होता है। उनके अनुसार, कलेक्टर बनना केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने, लोगों की समस्याओं का समाधान करने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर है।
सिंगरौली के सर्वांगीण विकास पर जोर
सिंगरौली में अपनी प्राथमिकताओं को लेकर कलेक्टर अस्थाना ने कहा कि जिला प्रदेश को बड़ा राजस्व देता है, इसलिए यहां के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। औद्योगिक विकास के साथ स्थापित उद्योगों, विस्थापित परिवारों और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय स्थापित करना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
चौथी कक्षा में पुरस्कार पाने वाले एक बच्चे से जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने तक का अंकित अस्थाना का सफर बताता है कि बचपन में देखा गया सपना यदि निरंतर मेहनत, अनुशासन और धैर्य से जोड़ा जाए, तो वह जीवन की दिशा तय कर सकता है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं।













