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अब हर काम के लिए ऐप खोलने की जरूरत होगी कम, एआई एजेंट संभालेंगे रोजमर्रा के काम

तकनीक की दुनिया में तेजी से बदल रहा इंटरनेट का इस्तेमाल, लेकिन निजता और सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ेंगी

नई दिल्ली। कल्पना कीजिए कि आपको परिवार के साथ डिनर पर जाना है। आप अपने डिजिटल सहायक को आसपास के अच्छे और किफायती रेस्तरां तलाशने के लिए कहते हैं। वह उपलब्ध विकल्पों की तुलना करता है, परिवार की पसंद के अनुसार सुझाव देता है और आपकी अनुमति मिलने पर टेबल बुक करने की प्रक्रिया भी पूरी कर सकता है। इस दौरान आपको अलग-अलग ऐप खोलने और बार-बार जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ती। तकनीक की दुनिया में इसी तरह के बदलाव की दिशा में एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई एजेंट तेजी से विकसित हो रहे हैं।

अब तक इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को अलग-अलग ऐप और वेबसाइट पर जाकर खुद विकल्प तलाशने पड़ते थे। सर्च इंजन जानकारी खोजने में मदद करते हैं, जबकि सामान्य चैटबॉट सवालों के जवाब और सुझाव देते हैं। इसके विपरीत, एआई एजेंट का उद्देश्य यूजर के लक्ष्य को समझकर काम की योजना बनाना और उपलब्ध डिजिटल साधनों के जरिए उसके कई चरण पूरे करने में सहायता करना है।

सामान्य एआई से आगे है एजेंटिक तकनीक

सामान्य एआई किसी सवाल का जवाब दे सकता है, लेख लिख सकता है या जानकारी का सार तैयार कर सकता है। वहीं, एआई एजेंट यात्रा की योजना बनाने, अलग-अलग सेवाओं की तुलना करने, बैठक का समय तय करने और दस्तावेजों से जानकारी जुटाने जैसे कई चरणों वाले काम में सहायता कर सकता है।

हालांकि, वास्तविक बुकिंग, भुगतान या संदेश भेजने जैसी कार्रवाई के लिए संबंधित सेवा तक पहुंच, जरूरी अनुमतियां और कई मामलों में यूजर की स्पष्ट पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि एआई एजेंट हर काम अपने आप और बिना किसी गलती के कर सकेंगे।

ऐप खत्म नहीं होंगे, इस्तेमाल का तरीका बदल सकता है

स्मार्टफोन पर बैंकिंग, खरीदारी, मनोरंजन, यात्रा और बातचीत के लिए अलग-अलग ऐप मौजूद हैं। एआई एजेंट के विस्तार से इन ऐप्स की जरूरत पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है, लेकिन उनका इस्तेमाल करने का तरीका बदल सकता है।

भविष्य में यूजर अपनी जरूरत सामान्य भाषा में बताएगा और एआई एजेंट विभिन्न डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर काम पूरा करने में मदद करेगा। इससे कई परिस्थितियों में ऐप्स के बीच बार-बार जाने और एक ही जानकारी दोबारा भरने की परेशानी कम हो सकती है।

मेटा, ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी तकनीकी कंपनियां एआई सहायकों और जटिल डिजिटल कार्यों को आसान बनाने वाले साधनों पर काम कर रही हैं। हालांकि, इनकी क्षमताएं, उपलब्धता और सुरक्षा सुविधाएं अलग-अलग हैं।

इंटरनेट के कारोबार पर भी पड़ेगा असर

आज कई वेबसाइटें विज्ञापन, सदस्यता, रेफरल और ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से कमाई करती हैं। यदि एआई एजेंट अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाकर सीधे यूजर को तैयार जवाब देने लगते हैं, तो कुछ वेबसाइटों पर सीधे आने वाले लोगों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, एआई के माध्यम से कंपनियों को नए ग्राहक भी मिल सकते हैं। ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों को अपनी सेवाओं और ग्राहकों तक पहुंचने के तरीकों में बदलाव करना पड़ सकता है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग एआई एजेंट का इस्तेमाल कितनी व्यापकता से करते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म उनके साथ किस तरह जुड़ते हैं।

निजता और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

एआई एजेंट को अधिक काम सौंपने के लिए ईमेल, कैलेंडर, दस्तावेजों या अन्य निजी जानकारियों तक पहुंच देनी पड़ सकती है। इससे सुविधा बढ़ती है, लेकिन गलत निर्देश, तकनीकी खामियों और दुर्भावनापूर्ण सामग्री के कारण अनचाही कार्रवाई होने का जोखिम भी रहता है।

इसलिए भुगतान, बैंकिंग, संवेदनशील दस्तावेज साझा करने और महत्वपूर्ण संदेश भेजने जैसे कामों में स्पष्ट अनुमति और मानवीय निगरानी जरूरी होगी। यूजर को यह जानने का अधिकार भी मिलना चाहिए कि एआई किन जानकारियों का इस्तेमाल कर रहा है और उसे कौन-कौन से काम करने की अनुमति मिली है।

सुविधा के साथ भरोसा भी जरूरी

एजेंटिक एआई इंटरनेट इस्तेमाल करने के अनुभव को अधिक सहज बना सकता है। कई चरणों वाले काम कम समय और मेहनत में पूरे हो सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण फैसलों में मानवीय निगरानी की जरूरत बनी रहेगी।

आने वाले समय में इंटरनेट का अनुभव इस बात से कम तय हो सकता है कि यूजर कितने ऐप खोलता है और इस बात से ज्यादा कि वह अपनी जरूरत कितनी आसानी से पूरी कर पाता है। हालांकि, इस तकनीक की सफलता केवल काम तेजी से पूरा करने पर निर्भर नहीं करेगी। सही जानकारी, डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और यूजर का अपने फैसलों पर नियंत्रण ही एआई एजेंट को रोजमर्रा की जिंदगी का भरोसेमंद हिस्सा बना सकेंगे।

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