आंध्र प्रदेश के तट से टकराया चक्रवात अर्नब, 150 किमी प्रति घंटे तक पहुंचे हवाओं के झोंके; गर्म समुद्र और अल नीनो की भूमिका पर उठे सवाल

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय क्षेत्र में दस्तक दी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, तूफान के दौरान हवा के झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। इसके साथ भारी बारिश, तेज हवाओं और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बना रहा। चक्रवात की तीव्रता ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या समुद्र के बढ़ते तापमान और अल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियां शक्तिशाली तूफानों के विकास में भूमिका निभा रही हैं।
हालांकि, किसी एक चक्रवात की तीव्रता को केवल जलवायु परिवर्तन या अल नीनो का परिणाम मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। इसके लिए समुद्र के तापमान, वातावरण में नमी, हवा की दिशा और ऊंचाई के साथ हवा की गति में होने वाले बदलाव सहित कई कारकों का विश्लेषण जरूरी होता है।
गर्म समुद्र से मिलती है चक्रवात को ऊर्जा
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को ऊर्जा देने में समुद्र की अहम भूमिका होती है। समुद्र की सतह गर्म होने पर पानी का वाष्पीकरण बढ़ सकता है। जलवाष्प ऊपर उठकर बादलों का निर्माण करती है और संघनन के दौरान निकलने वाली गर्मी तूफान के परिसंचरण को ऊर्जा देती है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे चक्रवात की तीव्रता बढ़ सकती है।
हालांकि, केवल समुद्र की सतह का तापमान ही निर्णायक नहीं होता। समुद्र में गर्म पानी कितनी गहराई तक मौजूद है, वातावरण में नमी कितनी है और तूफान के आसपास हवाओं की स्थिति कैसी है, ये सभी कारक महत्वपूर्ण हैं। ऊंचाई के साथ हवा की दिशा और गति में अधिक बदलाव चक्रवात के विकास को कमजोर भी कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों में अतिरिक्त गर्मी जमा हो रही है। इससे कुछ क्षेत्रों में शक्तिशाली चक्रवातों के अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर चक्रवात अधिक शक्तिशाली होगा या सभी क्षेत्रों में तूफानों की संख्या बढ़ेगी।
अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित हो सकता है, जिसका असर बारिश, तापमान और चक्रवातों के विकास पर पड़ता है।
हालांकि, अल नीनो का प्रभाव सभी महासागरों और चक्रवातों पर एक जैसा नहीं होता। बंगाल की खाड़ी में किसी तूफान की तीव्रता समुद्र के तापमान, नमी, हवा की स्थिति और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। इसलिए चक्रवात अर्नब के तेजी से मजबूत होने में अल नीनो की भूमिका तय करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक आंकड़ों की जरूरत होगी।
तेजी से मजबूत होने वाले तूफान बढ़ाते हैं चुनौती
जब किसी चक्रवात की अधिकतम लगातार हवा की गति कम समय में काफी बढ़ जाती है, तो उसे तेजी से तीव्र होने वाला चक्रवात कहा जाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के पास तैयारी के लिए कम समय बच सकता है।
चक्रवात से होने वाला नुकसान केवल हवा की गति पर निर्भर नहीं करता। भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें, तटीय जलभराव और तूफान के आगे बढ़ने की दिशा भी नुकसान की गंभीरता तय करती हैं। तट पार करने के बाद भी बारिश और बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।
तटीय क्षेत्रों में तैयारी जरूरी
आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में चक्रवातों से निपटने के लिए समय पर चेतावनी, सुरक्षित आश्रय स्थल, बिजली और संचार व्यवस्था की सुरक्षा तथा जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना महत्वपूर्ण है। तेज हवाओं से पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर इमारतें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। भारी बारिश से कृषि, सड़क परिवहन और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित हो सकते हैं।
चक्रवात अर्नब के संदर्भ में गर्म समुद्र और बदलती जलवायु परिस्थितियों पर उठ रहे सवाल महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी खास तूफान पर इनके प्रभाव का निष्कर्ष वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद ही निकाला जा सकता है। मौसम पूर्वानुमान में सुधार, आपदा प्रबंधन में निवेश और जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण के जरिए चक्रवातों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।













