सीकर के छोटे से गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं मेजर नव्या शेखावत, युवाओं और बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

नई दिल्ली। राजस्थान के सीकर जिले के केरपुरा गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने वाली मेजर नव्या शेखावत की उपलब्धि युवाओं, खासकर देश की सेवा का सपना देखने वाली बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। सेना में अधिकारी बनने से लेकर राष्ट्रपति की एड-डी-कैंप (ADC) जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर अनुशासन, मेहनत और निरंतर बेहतर प्रदर्शन की मिसाल पेश करता है।
नव्या की सैन्य यात्रा CDS जैसी प्रतियोगी परीक्षा से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुईं। अपनी कार्यक्षमता और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने राष्ट्रपति की ADC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल की।
युवाओं के लिए क्या है संदेश
मेजर नव्या शेखावत की कहानी उन युवाओं को संदेश देती है, जो भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देखते हैं। सैन्य करियर में सफलता के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व क्षमता और मानसिक दृढ़ता भी बेहद जरूरी है।
सेना में अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे युवाओं को UPSC की CDS परीक्षा की आधिकारिक अधिसूचनाओं, आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी रखनी चाहिए। इसके साथ ही एसएसबी चयन प्रक्रिया, व्यक्तित्व विकास और शारीरिक दक्षता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
मेजर नव्या की उपलब्धि यह संदेश देती है कि अवसर और मेहनत के दम पर महिलाएं भी सेना में प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा सकती हैं। सीकर के केरपुरा गांव से राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।













