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पांच दिनों का दीपोत्सव: आरोग्य, समृद्धि, प्रकृति संरक्षण और पारिवारिक सद्भाव का महापर्व

अंधकार से प्रकाश और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का संदेश देता है दीपोत्सव : पं. डॉ. एन.पी. मिश्र

सिंगरौली। भारतीय सनातन संस्कृति में दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि धनतेरस से भाई दूज तक मनाया जाने वाला पांच दिवसीय महापर्व है। यह पर्व आरोग्य, धन-समृद्धि, आध्यात्मिक चेतना, प्रकृति संरक्षण और पारिवारिक सद्भाव का संदेश देता है। ज्योतिषविद् पं. डॉ. एन.पी. मिश्र के अनुसार दीपोत्सव मनुष्य को अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और असत्य से सत्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा कर आरोग्य एवं समृद्धि की कामना की जाती है। नरक चतुर्दशी बुराइयों के त्याग, आत्मशुद्धि और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस दिन अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा है।
दीपावली पर भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। व्यापारी वर्ग बही-खातों का पूजन भी करता है।

गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट प्रकृति, गौवंश, कृषि और अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का स्मरण कर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। वहीं भाई दूज भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
डॉ. मिश्र के अनुसार दीपोत्सव का वास्तविक संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। उन्होंने मिट्टी के दीपक जलाने, प्रदूषण रहित दीपावली मनाने तथा बच्चों, बुजुर्गों और पशु-पक्षियों की सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की।

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