कलेक्टर की अध्यक्षता में बंधा कोल ब्लॉक समस्याओं पर महत्वपूर्ण बैठक, कंपनी को एक सप्ताह की समय-सीमा

सिंगरौली। आज कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर गौरव बैनल की अध्यक्षता में बंधा कोल ब्लॉक क्षेत्र से जुड़े विवादों और समस्याओं पर अहम बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एसडीएम देवसर अखिलेश सिंह, बिड़ला कंपनी के क्लस्टर हेड उमेश महतो, प्रोजेक्ट हेड दीपेश भाटिया और लीगल एडवाइजर बृजेश सिंह मौजूद रहे।
बैठक के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत 12 सूत्रीय मांग पत्र पर बिंदुवार चर्चा की गई। कलेक्टर ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्णय जनहित को सर्वोपरि रखते हुए ही लिया जाएगा।
ग्रामीणों की ओर से सरपंच बंधा एवं जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक ने सभी मुद्दों को मजबूती से रखा तथा भुअर्जन नियम के अनुरूप कार्रवाई की मांग की। बैठक में प्रमुख रूप से सविता सिंह (जनपद अध्यक्ष वैढन), घनश्याम पाठक (वरिष्ठ समाजसेवी), रमाशंकर शुक्ल (अध्यक्ष इंटक कांग्रेस), सीपी शुक्ला (पूर्व प्रदेश प्रवक्ता), नरेंद्र मिश्रा (प्रदेश महासचिव इंटक), केडी वैश्य (सरपंच जमगादी), छोटे सिंह मरावी (सरपंच तेंदुआ), मुन्नीलाल कोल (सरपंच पचौर), अनित सिंह (पूर्व सरपंच देवरी) सहित कोल ब्लॉक क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण शामिल रहे।बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और उम्मीद जताई गई कि निर्धारित समय-सीमा में समाधान सामने आएगा।
कंपनी को पेड़ कटाई की अनुमति से पहले समस्याओं का समाधान किया जाए: विस्थापितों ने कलेक्टर को सौंपा 12 सूत्रीय मांगपत्र
सिंगरौली। कोल ब्लॉक बंधा (तहसील बरगवां) के ग्रामीणों ने कलेक्टर सिंगरौली को 12 सूत्रीय विस्तृत मांगपत्र सौंपते हुए आग्रह किया है कि जब तक विस्थापितों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक कंपनी को वन भूमि में पेड़ कटाई की अनुमति न दी जाए।ग्रामीणों ने बताया कि धारा 4 (2021), धारा 11 (2022) तथा एवार्ड (7 अप्रैल 2025) की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रभावित जनता ने जिला से लेकर राज्य स्तर तक कई बार आवेदन दिए और सैकड़ों याचिकाएं न्यायालय में भी लंबित हैं, लेकिन अभी तक उचित कार्रवाई नहीं हुई है।
मांगपत्र में परिसंपत्ति मूल्यांकन को 2022 की दर से संशोधित करने, विस्थापित सूची का प्रकाशन, पेड़-पौधों का पुनर्मूल्यांकन, एवार्ड से बाहर छोड़ी गई परिसंपत्तियों को शामिल करने, मूल कंपनी बिरला में स्थाई रोजगार देने, विस्थापित वाहनों को प्राथमिकता, तथा 70प्रतिशत रोजगार प्रभावितों को देने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासन ने नियमों की अनदेखी कर कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जबकि स्थानीय लोगों को अपूरणीय क्षति हुई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विस्थापन के बाद ही वन भूमि पर पेड़ कटाई की अनुमति दी जाए, अन्यथा बड़े विवाद की स्थिति बन सकती है।मांगपत्र जनपद पंचायत वैढ़न की अध्यक्ष सविता सिंह सहित ग्राम बंधा, तेंदुहा, पिडरवाह, देवरी और पचौर के विस्थापितों ने संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया।













