मेढौली वार्ड 10 में खनन से बिगड़े हालात, ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव

सिंगरौली।मेढौली वार्ड क्रमांक 10 में खनन गतिविधियों के चलते स्थानीय ग्रामीणों की जीवन स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। हाल ही में कंबल वितरण के लिए क्षेत्र में पहुंचे अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के पदाधिकारियों ने ग्रामीणों की दयनीय स्थिति देख कर चिंता व्यक्त की।
स्थानीय लोगों ने बताया कि चारों ओर खनन गतिविधियों के कारण आने-जाने के लिए केवल एक संकरा कच्चा रास्ता बचा है। क्षेत्र में पीने के पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। लगातार हो रही ब्लास्टिंग से कई मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। प्रभावित परिवारों का मामला एनसीएल के साथ लंबे समय से लंबित है, और अब तक उन्हें न तो आवास के बदले प्लॉट मिला है और न ही मुआवजे की राशि का भुगतान किया गया है।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अमित तिवारी ने बताया कि क्षेत्र में गोंड, बैगा, खैरवार और अगरिया जैसी वनवासी जनजातियों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। ब्लास्टिंग के दौरान ग्रामीणों को पेड़ों के नीचे छिपकर अपनी जान बचानी पड़ती है, लेकिन उनकी सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
अमित तिवारी ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस गंभीर मानवीय समस्या पर नजरअंदाज कर रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों द्वारा एनसीएल के साथ मिलीभगत के कारण ग्रामीणों की यह स्थिति बनी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा, सुरक्षित पुनर्वास और पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएँ, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।













