राहुल गांधी का इंदौर जल त्रासदी पर हमला, भाजपा और पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, : मध्यप्रदेश के इंदौर में कथित तौर पर दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जब भी देश में गरीबों की जान जाती है, पीएम मोदी मौन साध लेते हैं और जवाबदेही से बचते हैं।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि इंदौर में कम से कम दस लोगों की मौत दूषित पानी पीने से हुई है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कोई संवेदनशीलता या जवाबदेही नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने वाला मुद्दा बताया और कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश में फैले कुशासन का और एक दर्दनाक उदाहरण है।
कांग्रेस नेता ने राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को उजागर करते हुए कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब राज्य में लापरवाही के कारण लोग मारे गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले जहरीली खांसी की सिरप से बच्चों की मौतें हुईं, सरकारी अस्पतालों में गंदगी और अव्यवस्था के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ी, और अब साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी लोगों को सुरक्षित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
राहुल गांधी ने भाजपा की “डबल इंजन सरकार” पर भी हमला करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद मध्यप्रदेश में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर डबल इंजन सरकार का दावा सही है, तो फिर आम जनता को क्यों नहीं मिल रही हैं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छ पानी।
इंदौर की इस घटना को लेकर राहुल गांधी ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर समय रहते जल आपूर्ति की गुणवत्ता की जांच की जाती और आवश्यक सावधानियां बरती जातीं, तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने इसे इंदौर या मध्यप्रदेश का मामला न मानते हुए देशभर में शासन की गुणवत्ता और संवेदनशीलता से जुड़ा सवाल बताया।
उन्होंने अंत में कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो हर नागरिक की जान को समान महत्व दे, चाहे वह अमीर हो या गरीब। इंदौर की घटना को उन्होंने एक चेतावनी के रूप में बताया और कहा कि अगर अब भी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसी त्रासदियां भविष्य में और बढ़ सकती हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। यह मामला न केवल मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की जवाबदेही को लेकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता नजर आ रहा है।













