एनसीएल द्वारा विस्थापितों के लिए एक समान विस्थापन राशि की मांग, कलेक्टर से मिला आश्वासन

सिंगरौली- सिंगरौली जिले के मोरवा क्षेत्र में एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड) द्वारा कोयला खदान के विस्तार के लिए विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस विस्थापन से 22,000 मकान गिराने की योजना है, जिससे 50,000 से अधिक लोग प्रभावित होंगे। हालांकि, विस्थापितों में विस्थापन राशि को लेकर गहरी नाराजगी है, क्योंकि कई ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें भेदभावपूर्ण तरीके से विस्थापन राशि दी जा रही है।
बुधवार को सैकड़ों विस्थापित कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और उन्होंने एक समान विस्थापन राशि दिए जाने की मांग की। विस्थापितों का कहना है कि एनसीएल द्वारा पहले भी विस्थापन किया गया था, जैसे कि जयंत परियोजना के विस्तार के दौरान, जहां पट्टाधारी और गैर पट्टाधारी दोनों को समान विस्थापन लाभ दिया गया था। इस बार, विस्थापितों का आरोप है कि एनसीएल प्रबंधन दोहरी नीति अपना रहा है और पट्टाधारी विस्थापितों को अधिक लाभ दिया जा रहा है।
विस्थापितों का आरोप है कि गैर पट्टाधारी परिवारों को 5 लाख रुपये विस्थापन राशि और 6 लाख रुपये प्लॉट राशि दी जा रही है, जबकि पट्टाधारी परिवारों को 15 लाख रुपये विस्थापन राशि और 18 लाख रुपये प्लॉट राशि दी जा रही है। यह भेदभाव विस्थापितों के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर उन परिवारों के लिए जो 40-50 वर्षों से एक ही जमीन पर रहकर अपना जीवन यापन कर रहे थे।
गैर पट्टाधारी विस्थापितों का कहना है कि उन्हें नई जगह पर बसने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने अपने घर और संपत्ति लंबे समय से उसी भूमि पर बनाई थी। अगर उन्हें सम्पूर्ण विस्थापन लाभ नहीं मिलता, तो उन्हें नई जगह पर पुन: बसने में कठिनाई होगी।
विस्थापितों की मांग को सुनते हुए, कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा कि उन्होंने विस्थापितों की मांग को गंभीरता से सुना और समझा है। कलेक्टर ने कहा, मैंने एसडीएम को निरीक्षण के आदेश दिए हैं और जो भी नियम में उचित होगा, वह किया जाएगा। विस्थापन का पूरा लाभ सभी को मिलेगा।” कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि पारदर्शिता के साथ विस्थापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी और किसी भी विस्थापित को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि विस्थापन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के भेदभाव की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी और समान विस्थापन लाभ देने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी। विस्थापितों को राहत देने के लिए जल्द ही कार्रवाई की जाएगी और इस मुद्दे का समाधान निकाला जाएगा।यह पूरा मामला सिंगरौली जिले में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है, क्योंकि जमीन अधिग्रहण से जुड़े विस्थापन लाभ में भेदभाव के आरोप के कारण लोगों के मन में असंतोष और भ्रम पैदा हो गया है।













