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अप्रकाशित सैन्य आत्मकथा पर सियासी घमासान, संसद में गरमाया ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ विवाद

नई दिल्ली। भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पुस्तक की प्रिंट कॉपी दिखाए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है और रक्षा मंत्रालय की मंजूरी प्रक्रिया में लंबित है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पुस्तक के किसी भी हिस्से का संसद में संदर्भ देना उचित नहीं माना जा सकता। इसके बाद भारत-चीन सीमा विवाद और सैन्य रणनीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

बताया जा रहा है कि जनरल नरवणे की यह आत्मकथा वर्ष 2023 से रक्षा मंत्रालय की स्वीकृति के लिए लंबित है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुस्तक में भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य हो सकते हैं जिन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि संवेदनशील रक्षा दस्तावेजों और पूर्व सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों को प्रकाशित करने से पहले तय प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है।

इस विवाद के बीच जनरल नरवणे ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि इससे पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि आत्मकथा लिखने का विचार वर्ष 2023 में दिवंगत जनरल बिपिन रावत पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान सामने आया था। बाद में उन्होंने अपने सैन्य जीवन के अनुभवों को पुस्तक के रूप में संकलित करने का निर्णय लिया।

जनरल नरवणे के अनुसार, सेना में बिताए गए वर्षों के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण घटनाओं और निर्णयों को करीब से देखा, जिन्हें इतिहास के रूप में दर्ज करना जरूरी लगा। उनका मानना था कि यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का माध्यम बन सकती है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पूर्व सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों के प्रकाशन से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि उनमें किसी भी प्रकार की गोपनीय या रणनीतिक जानकारी सार्वजनिक न हो। मंत्रालय का कहना है कि यह प्रक्रिया सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों पर समान रूप से लागू होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत-चीन सीमा मुद्दा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। विपक्ष जहां पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुस्तक को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और इसका प्रकाशन कब संभव होगा, लेकिन इस विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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