संसद में हंगामे के बीच लोकसभा स्थगित, पीएम मोदी नहीं दे सके राष्ट्रपति अभिभाषण पर जवाब

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव उस समय चरम पर पहुंच गया जब विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर प्रस्तावित जवाब नहीं दे सके। इससे सरकार और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, जिसे बजट सत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। इस जवाब के माध्यम से सरकार अपनी नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का पक्ष प्रस्तुत करती है। लेकिन सदन में लगातार विरोध के चलते कार्यवाही निर्धारित समय पर नहीं चल सकी।
विपक्ष ने लगाए आवाज दबाने के आरोप
लोकसभा में विपक्षी दलों ने कई राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात पूरी रखने का मौका नहीं दिया गया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
राज्यसभा में भी सरकार पर हमला
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जातिगत जनगणना, महिला सशक्तिकरण, केंद्र सरकार की योजनाओं और मणिपुर की स्थिति जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महिला नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही मणिपुर हिंसा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री के दौरे में देरी को लेकर आलोचना की।
नरवणे की आत्मकथा पर भी गरमाई राजनीति
लोकसभा में चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का मुद्दा भी उठा। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस पुस्तक की प्रति प्रधानमंत्री को देना चाहते हैं, जिससे सदन में तीखी बहस शुरू हो गई।
आठ विपक्षी सांसद निलंबित
संसद में बढ़ते टकराव के बीच कथित अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इनमें मणिकम टैगोर, किरण रेड्डी, प्रशांत पडोले, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत औजला, एस वेंकट रमन और डीन कुरियाकोस शामिल हैं। विपक्ष ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा प्रभावित
लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पेश किया था, जिसका समर्थन भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने किया। इस पर चर्चा के लिए 18 घंटे निर्धारित किए गए थे और समापन पर प्रधानमंत्री को जवाब देना था। वहीं राज्यसभा में यह प्रस्ताव भाजपा सांसद सदानंद मास्टर ने पेश किया था। हालांकि लोकसभा में गतिरोध के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
आगामी कार्यवाही पर टिकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में जारी गतिरोध का असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संसद का सुचारू संचालन लोकतंत्र के लिए जरूरी है और लगातार हंगामे से विधायी कार्य प्रभावित होते हैं।
संसद के दोनों सदनों में चर्चा गुरुवार को फिर से शुरू होने की संभावना है। सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी अगली बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देंगे, जबकि विपक्ष ने अपने मुद्दों पर दबाव बनाए रखने के संकेत दिए हैं।













