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वेटरिनरी काउंसिल गठन की जरूरत: मोहन भागवत

नई दिल्‍ली-नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पशु चिकित्सा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अलग वेटरिनरी काउंसिल के गठन की वकालत की। उन्होंने कहा कि जानवरों और जनसुरक्षा से जुड़े फैसले वेटरिनरी डॉक्टरों और विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही होने चाहिए।

मोहन भागवत गुरुवार को नागपुर में इंडियन सोसायटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस (आईएसएसीपी) के 22वें वार्षिक अधिवेशन और ‘रोल ऑफ कैनाइन इन वन हेल्थ: बिल्डिंग पार्टनरशिप्स एंड रिजॉल्विंग चैलेंजेज’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन आईएसएसीपी, महाराष्ट्र एनिमल एंड फिशरी साइंसेज यूनिवर्सिटी (एमएएफएसयू) और नेशनल एसोसिएशन फॉर वेलफेयर ऑफ एनिमल्स एंड रिसर्च (एनएडब्ल्यूएआर) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि उन्होंने इसी कॉलेज से पढ़ाई की है और पूर्व छात्र के रूप में कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश को तब तक अधिक लाभ मिला, जब तक किसान खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन भी करते रहे।

उन्होंने कहा कि वेटरिनरी डॉक्टरों की भूमिका केवल पशु चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, जनस्वास्थ्य और नीति निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। दिल्ली में लावारिस कुत्तों को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर भावनाओं के बजाय वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए नसबंदी जैसे उपायों पर जोर दिया।

भागवत ने कहा कि पशुओं से जुड़े मामलों में निर्णय उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा लिए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में अलग वेटरिनरी काउंसिल का गठन आवश्यक है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े निर्णय अधिक प्रभावी ढंग से लिए जा सकें।

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