घर के गोरुआ मरय पेटागन, एक बोझा बिन चारा के। कुछ बरेज सब सरिगा संचय, जरिगय दूब पहार के : डॉ उमेश लखन
बाबा महाराज देवरी में काव्य, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम

भुईमाड़। सीधी जिले की कुशमी तहसील अंतर्गत पावन बाबा महाराज देवरी धाम में महाशिवरात्रि पर्व श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी यहाँ रामचरितमानस पाठ, पारंपरिक मेला तथा विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहा। महाशिवरात्रि के अगले दिन सोमवार को देवरी परिसर में भव्य मेला सजा, जहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इसी अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री कमलेश्वर द्विवेदी रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जनपद सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा एवं कृपा शंकर द्विवेदी की उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का संचालन रुकमणी पंडित ने प्रभावशाली और सुव्यवस्थित ढंग से किया। कवि सम्मेलन में डॉ. उमेश लखन ने अपनी सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन की पीड़ा, प्रशासनिक विसंगतियों और व्यवस्था की विडंबनाओं को मार्मिक स्वर दिया। उनकी पंक्तियाँ—“घर के गोरुआ मरय पेटागन, एक बोझा बिन चारा के…”ने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया और उन्हें समाज की वास्तविकताओं पर चिंतन करने को प्रेरित किया। वहीं कवि डॉ. राजकुमार शर्मा ‘राज’ ने विंध्य की गौरवगाथा, मातृभूमि के सम्मान और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने के संदेश से वातावरण में आत्मीयता और देशप्रेम का भाव भर दिया।

उनकी काव्य प्रस्तुति ने श्रोताओं के हृदय में क्षेत्रीय गौरव की भावना को और प्रगाढ़ किया।कवि सम्मेलन का श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में बाबा महाराज सेवा धाम समिति, देवरी द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बनकर क्षेत्र में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।













