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मुफ्त सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘रोजगार दें, निर्भरता नहीं’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों द्वारा मुफ्त सुविधाएं बांटने की नीति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि लोगों को सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली मिलती रहेगी तो वे काम क्यों करेंगे। अदालत ने कहा कि इस तरह की योजनाएं लोगों में काम करने की आदत को कमजोर कर सकती हैं और सरकारों को रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। कंपनी ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के नियम 23 को चुनौती दी है, जिसमें उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी विकास को नजरअंदाज कर मुफ्त योजनाओं की घोषणाएं की जा रही हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि जो लोग भुगतान करने में सक्षम हैं और जो नहीं हैं, उनके बीच बिना अंतर किए मुफ्त सुविधा देना क्या उचित है।

कोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों के लिए होनी चाहिए, लेकिन सबको समान रूप से मुफ्त सुविधा देना संतुलित नीति नहीं है। मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब मांगा गया है।

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