शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया

वाराणसी। बच्चों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में नाम आने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके कुछ शिष्यों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इस बीच उन्होंने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।
मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि मामले की जांच शुरू हो चुकी है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पहले जो सवाल पूछे गए थे, उनके जवाब दिए जा चुके हैं और अब जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, तथ्य सामने आ जाएंगे।
फोटो वायरल होने पर उठाए सवाल
पुलिसकर्मियों के साथ कथित फोटो वायरल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि तस्वीरें कहां से आईं। उनका कहना था कि यदि फोटो संबंधित अकाउंट से पोस्ट की गई थीं, तो यह भी जांच का विषय है कि कहीं वे एआई जनरेटेड तो नहीं हैं और उन्हें किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया।
21 लाख इनाम बयान पर सफाई
आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटने पर 21 लाख रुपये इनाम की कथित घोषणा को लेकर उन्होंने कहा कि यह साधु-संतों के बीच आक्रोश की अभिव्यक्ति भर है। उन्होंने कहा कि उनके धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और इस प्रकार की बातें गुस्से में कही गईं, जिन्हें शाब्दिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगना अत्यंत संवेदनशील मामला है। इसलिए इसकी निष्पक्ष और स्पष्ट जांच होनी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और पद की गरिमा बनी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस पर आम जनता का भरोसा कम है, इसलिए गैर-भाजपा शासित राज्यों की पुलिस की एक संयुक्त समिति बनाकर जांच कराई जानी चाहिए, जिससे सभी तथ्यों का निष्पक्ष खुलासा हो सके।
फिलहाल, मामले में जांच जारी है और अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।













