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पश्चिम बंगाल मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वीएम पंचोली शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत इस मामले का व्यावहारिक समाधान निकालने का प्रयास करेगी और वास्तविक मतदाताओं का अधिकार सुरक्षित रखा जाएगा। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि मतदाताओं को नोटिस जारी करते समय सावधानी बरती जाए।

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए केवल 11 दिन शेष हैं, जबकि सुनवाई के लिए सीमित समय बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 70 लाख लोगों को नाम में मामूली त्रुटियों के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई दस्तावेज जैसे डोमिसाइल प्रमाणपत्र, आधार और ओबीसी प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं तथा लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी स्वयं अदालत में उपस्थित हुईं और कहा कि एसआईआर प्रक्रिया से भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं तथा राज्य को निशाना बनाया जा रहा है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आधार कार्ड के मुद्दे पर फिलहाल अदालत कोई टिप्पणी नहीं करेगी, लेकिन नाम और वर्तनी संबंधी शिकायतों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा जाएगा।

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि आयोग ने राज्य सरकार से क्लास-2 अधिकारियों को ईआरओ के रूप में नियुक्त करने का आग्रह किया था, लेकिन पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी कारण माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले का व्यावहारिक समाधान तलाशने का प्रयास करेगा और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

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