
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने देश की न्यायपालिका, पुलिस कार्यप्रणाली और बढ़ते मुकदमों के बोझ पर गंभीर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की नेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 में उन्होंने कहा कि आज कुछ जज “राजा से ज्यादा वफादार” बनने की मानसिकता से प्रभावित हैं, जिसके चलते उचित मामलों में भी जमानत नहीं दी जा रही।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि असहमति जताना कोई अपराध नहीं है और एक विकसित समाज में विचारों की स्वतंत्रता व सहनशीलता जरूरी है। सामाजिक भेदभाव पर भी प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि दलितों के साथ किसी भी तरह का अपमानजनक व्यवहार विकसित भारत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
लंबित मामलों के बढ़ते बोझ पर जस्टिस भुइयां ने बेबुनियाद एफआईआर और तुच्छ मामलों को जिम्मेदार बताया। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट, मीम्स और छोटे-छोटे विवादों पर भी केस दर्ज हो रहे हैं, जिससे न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
उन्होंने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) को कठोर बताते हुए गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि कम दोषसिद्धि दर यह दर्शाती है कि कई मामलों में बिना ठोस सबूत के जल्दबाजी में कार्रवाई की जा रही है, जिससे निर्दोष लोगों को परेशानी होती है।













