चितरंगी में खदान परियोजनाओं का विरोध, आदिवासी विस्थापन बना बड़ा मुद्दा
ग्राम सभा की अनुमति बिना काम नहीं, कांग्रेस का अल्टीमेटम

सिंगरौली: सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में प्रस्तावित खदान परियोजनाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कुंदन गोल्ड माइंस और अन्य कंपनियों के विरोध में ग्रामीणों के साथ कांग्रेस नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी स्थिति में कंपनी को काम नहीं करने दिया जाएगा।
चितरंगी विधानसभा के सिलफोरी, सिधार, दुधमनिया और अजगुड़ सहित कई गांवों में खदान लीज को लेकर आदिवासी परिवारों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनियां बिना सहमति के जमीन पर काम शुरू कर रही हैं, जिससे उन्हें बेघर होने का खतरा है।
कांग्रेस की पूर्व विधायक सरस्वती सिंह और किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अशोक सिंह पैगाम ने प्रशासन के साथ बैठक में स्पष्ट कहा कि जब तक ग्राम सभा और पंचायत की अनुमति नहीं होगी, तब तक परियोजनाएं शुरू नहीं होने दी जाएंगी। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों के साथ अन्याय हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
वहीं आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे अपनी जमीन और जंगल किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। उनका आरोप है कि कंपनियां प्रशासनिक दबाव में कार्य कर रही हैं और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
इस पूरे मामले में देवेंद्र द्विवेदी ने बताया कि सभी पक्षों के साथ बैठक कर उनकी बातें सुनी गई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और न्यायपूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल यह मुद्दा जिले में गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।













