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बाल श्रम एवं बधुआ मजूदरी के लिए प्रशासन सख्त उल्लघन करने पर होगी एफआईआर दर्ज

जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में उद्योगो, ढाबो और संवेदनशील क्षेत्रो के नियमिति निरीक्षण करने का कलेक्टर ने दिए निर्देश

सिंगरौली – कलेक्टर गौरव बैनल की अध्यक्षता में एवं पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री के गरिमामय उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूर जिला स्तरीय टास्क फोर्स’ की बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करने के लिए जिले में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।

बैठक में कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित करे। श्रम विभाग के अधिकारियों को विभिन्न उद्योगों, ईंट-भट्टों, होटलों और ढाबों में सघन जांच अभियान चलाकर बाल श्रमिकों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।बैठक में कलेक्टर ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल रेस्क्यू ही नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बल दिया गया कि मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास ,अनिवार्य स्कूली शिक्षा और उन्हें सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें। बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाते हुए उनकी काउंसलिंग भी करे।कलेक्टर ने इस आशय के निर्देश दिए ने आम जनता को जागरूक करे एवं अधिनियम के बारे में जानकारी दे कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बंधुआ मजदूरी से संबंधित कोई जानकारी मिले, तो तत्काल संबंधित अधिकारियों या हेल्पलाईन नंबर पर सूचना दें।

कलेक्टर ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन अपराध है। 14 से 18 वर्ष के किशोरों को भी खतरनाक उद्योगों में नियोजित नहीं किया जा सकता।बंधुआ मजदूरीः जब किसी व्यक्ति को कर्ज के बदले या कम मजदूरी पर जबरन काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और उसकी आवाजाही पर प्रतिबंध होता है, तो वह बंधुआ मजदूरी की श्रेणी में आता हैबाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत नियोक्ता को 6 माह से 2 वर्ष तक की जेल और 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

 

बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत दोषियों को 3 वर्ष तक का कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है। कलेक्टर ने कहा कि कि “बचपन बचाओ अभियान के तहत जिले को बाल श्रम मुक्त बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान श्रम विभाग के प्रभारी अधिकारी नवनीत पाण्डेय, श्रम निरीक्षक राहुल प्रधान, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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