पोषण वाटिका से बदली स्कूल की तस्वीर, शिक्षक शैलेन्द्र सिंह का नवाचार बना मिसाल

सिंगरौली- शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार में पदस्थ शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र प्रताप सिंह के नवाचारी प्रयास ने शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नई मिसाल पेश की है। उनके नेतृत्व में विद्यालय परिसर में विकसित “पोषण वाटिका” अब बच्चों के लिए पौष्टिक आहार का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है।
इस वाटिका में उगाई जा रही ताजी सब्जियां जैसे लौकी, टमाटर, भिंडी, मिर्च और केले का उपयोग सीधे मध्यान्ह भोजन में किया जा रहा है। इसका असर बच्चों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। पौष्टिक भोजन मिलने से न केवल बच्चों की सेहत में सुधार हुआ है, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है। साथ ही विद्यालय में नामांकन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
शिक्षकों के अनुसार, पोषणयुक्त आहार मिलने से बच्चों की एकाग्रता बढ़ी है और वे पढ़ाई में अधिक रुचि लेने लगे हैं। कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ी है, जिससे सीखने के स्तर में भी स्पष्ट सुधार देखा गया है।
इस पहल की खास बात यह भी है कि बच्चे स्वयं पौधरोपण और उसकी देखभाल में भाग लेते हैं। इससे उनमें अनुभवात्मक अधिगम के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित हो रही है।
सीमित संसाधनों में शुरू की गई यह पहल आज एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है। शैलेन्द्र प्रताप सिंह का यह प्रयास न केवल विद्यालय के लिए बल्कि अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है, जहां इस तरह की पहल से शिक्षा और पोषण दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।













