गैस संकट से होटल-ढाबों पर असर, अब लकड़ी-कोयले से चल रहा काम

सिंगरौली। जिले के देवसर क्षेत्र में इन दिनों होटल और ढाबा संचालक ईंधन के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। एलपीजी गैस की कमी और प्रशासनिक सख्ती के बाद हालात ऐसे बन गए हैं कि छोटे से लेकर बड़े होटल संचालक भी पारंपरिक तरीकों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
पहले कई होटल-ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक रूप से किया जा रहा था, जिसे लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे अब घरेलू गैस का उपयोग लगभग बंद हो गया है। हालांकि, इसके साथ ही कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे संचालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
वर्तमान स्थिति यह है कि अधिकांश होटल और ढाबे अब लकड़ी, उपले और कोयले के सहारे भोजन तैयार कर रहे हैं। इससे कामकाज की गति धीमी हो गई है और धुएं के कारण प्रदूषण भी बढ़ रहा है। कई संचालकों का कहना है कि इस व्यवस्था में समय अधिक लगता है और लागत भी बढ़ रही है।
स्थानीय होटल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है और उनकी कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में व्यवसाय चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कई लोगों को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है।
वहीं, स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि होटल और ढाबा संचालकों के लिए कमर्शियल गैस की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे नियमों के तहत अपना काम कर सकें और क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सके।













