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सुप्रीम कोर्ट से टीएमसी को बड़ा झटका: चुनाव आयोग के काम में दखल से इनकार, कहा- ‘सरकारी कर्मचारियों पर भरोसा रखें’

मतगणना में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कानूनी मोर्चे पर बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस फैसले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें मतगणना प्रक्रिया के दौरान पर्यवेक्षकों के तौर पर केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों की तैनाती की बात कही गई थी।

‘धारणा ही गलत है’ : सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टीएमसी की दलीलों को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की यह सोच गलत है कि केंद्र सरकार का कर्मचारी अनिवार्य रूप से उनके खिलाफ ही काम करेगा। अदालत ने नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी को सरकारी कर्मचारियों पर भरोसा करना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी तरह से एक ही समूह (केंद्र सरकार के कर्मचारी) में से चयन करना नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।

कपिल सिब्बल की दलीलें रहीं बेअसर
टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तर्क दिया था कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को छोड़कर केवल केंद्र के प्रतिनिधियों की मांग करना राज्य प्रशासन पर उंगली उठाने जैसा है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को यह कहते हुए दरकिनार कर दिया कि मतगणना के समय वहां काउंटिंग एजेंट, सुपरवाइजर और माइक्रो ऑब्जर्वर जैसे कई लोग मौजूद होते हैं, जिससे निष्पक्षता बनी रहती है।

क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव की मतगणना के लिए पर्यवेक्षकों के रूप में केवल केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती का निर्णय लिया। टीएमसी ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए पहले कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहां से याचिका खारिज होने के बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन अब देश की शीर्ष अदालत ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

इस फैसले के बाद अब मतगणना की प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित पुरानी रूपरेखा के अनुसार ही पूरी की जाएगी।

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