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अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थान अब अपने यहां प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे और इसमें राज्य शासन का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा।

यह मामला वर्ष 2021 में जारी दो आदेशों से जुड़ा था। विदिशा के एसएसएल जैन पीजी कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जहां कॉलेज प्रबंधन द्वारा नियुक्त व्यक्ति के आदेश को क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने निरस्त कर दिया था। इस निर्णय को कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

शुरुआत में एकलपीठ ने शासन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन पुनर्विचार याचिका के बाद मामला युगलपीठ में पहुंचा। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने 25 अगस्त और 8 सितंबर 2021 के परिपत्रों को निरस्त कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि संस्थान को योग्य व्यक्ति के चयन का संवैधानिक अधिकार है, चाहे वह वरिष्ठ हो या कनिष्ठ। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार संस्थान द्वारा नियुक्ति कर दिए जाने के बाद उसकी उपयुक्तता में सरकार या न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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