
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले में देर रात एक भीषण हादसा होते-होते टल गया। गंगा नदी पर स्थित प्रसिद्ध विक्रमशिला पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नदी में जा गिरा। गनीमत यह रही कि जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की सूझबूझ से पुल गिरने के मात्र 15 मिनट पहले ही आवाजाही रोक दी गई थी, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई।
सतर्कता ने बचाई सैकड़ों जान
जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों और स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को पुल के हिस्से में कमजोरी का आभास हो गया था। खतरे को भांपते हुए तत्काल प्रभाव से लोगों और वाहनों को प्रभावित हिस्से से हटा लिया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के महज 15 मिनट बाद ही पुल का भारी-भरकम स्लैब सीधे गंगा नदी में समा गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
दोनों तरफ से सील हुआ पुल, आवाजाही ठप
हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पुल को भागलपुर और नौगछिया दोनों तरफ से पूरी तरह सील कर दिया है। वर्तमान में पुल पर सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित है। रात के समय वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वैकल्पिक मार्ग: मुंगेर होकर करना होगा सफर
प्रशासन ने भागलपुर और नौगछिया के बीच यात्रा करने वालों के लिए मुंगेर पुल को वैकल्पिक मार्ग के तौर पर सुझाया है।
दूरी का अंतर: मुंगेर पुल यहां से लगभग 60 किलोमीटर दूर है।
प्रभाव: यात्रियों को अब लंबी दूरी तय करनी होगी, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी।
25 साल में ही जवाब दे गई ‘जीवनरेखा’
विक्रमशिला पुल का निर्माण वर्ष 2001 में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। करीब 4.5 किलोमीटर लंबा यह पुल भागलपुर की लाइफलाइन माना जाता है, जिससे प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। निर्माण के मात्र 25 वर्षों के भीतर पुल का हिस्सा गिरना निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन अब विशेषज्ञों की टीम के जरिए पुल की जांच कराने और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में जुटा है।













