बंगाल में ‘भगवा’ लहर: रुझानों में भाजपा को प्रचंड बहुमत, टीएमसी के चार गढ़ों में ‘सूपड़ा साफ’
192 सीटों पर भाजपा की बढ़त से राजनीतिक गलियारों में हलचल; श्रीलंकाई नेता सजित प्रेमदासा ने पीएम मोदी को दी जीत की बधाई

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राज्य की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 192 सीटों पर बढ़त के साथ प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मात्र 92 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।
इन चार जिलों में नहीं खुला टीएमसी का खाता
रुझानों की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बंगाल के चार प्रमुख जिलों में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का खाता तक खुलता नहीं दिख रहा है। उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक भाजपा ने मजबूत सेंधमारी की है:
झारग्राम: आदिवासी बहुल जंगलमहल क्षेत्र की सभी 4 सीटों (नयाग्राम, गोपीबल्लवपुर, झारग्राम और बिनपुर) पर भाजपा आगे है।
अलीपुरद्वार: जिले की सभी 5 सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने मजबूत बढ़त बनाई है।
जलपाईगुड़ी: यहां की सभी 7 सीटों पर भाजपा का दबदबा बरकरार है।
पश्चिम बर्धमान: इस औद्योगिक जिले में भी टीएमसी पिछड़ती नजर आ रही है।
वैश्विक स्तर पर गूंजी जीत: श्रीलंका से मिली बधाई
अभी अंतिम नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन रुझानों को देखते हुए पड़ोसी देश श्रीलंका से बधाई संदेश आने शुरू हो गए हैं। श्रीलंका में विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने सोशल मीडिया (X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा— “पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत पर पीएम मोदी और भाजपा को बधाई। यह जनादेश लोगों की इच्छा और लोकतांत्रिक भागीदारी की ताकत को दिखाता है।”
आंकड़ों की जुबानी: कौन कहाँ खड़ा है?
सुबह के रुझानों के अनुसार विधानसभा की स्थिति:
पार्टी बढ़त (सीटें)
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 192
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 92
AJUP 02
अन्य (CPM, AISF, BGPM) 03
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हिंसा और पुनर्मतदान का साया
इस बार बंगाल में चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए, जिसमें कुछ स्थानों पर झड़पों की खबरें भी आईं। दक्षिण 24 परगना की फाल्टा सीट पर हिंसा के चलते चुनाव आयोग ने मतदान स्थगित कर दिया था, जहाँ आने वाले दिनों में वोटिंग होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक ‘पावर शिफ्ट’ होगा। फिलहाल, मतगणना केंद्रों के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और समर्थकों का उत्साह चरम पर है।













