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रेलवे परियोजना प्रभावितों ने रोजगार और मुआवजे की मांग उठाई

ललितपुर–सिंगरौली रेलवे परियोजना को लेकर प्रभावित परिवारों का सार्वजनिक निवेदन

सिंगरौली। ललितपुर–सिंगरौली रेलवे परियोजना से प्रभावित परिवारों एवं आम जनता ने रोजगार और मुआवजे की मांग को लेकर सार्वजनिक निवेदन जारी किया है। प्रभावितों का आरोप है कि रेलवे परियोजना के लिए उनकी भूमि, मकान एवं अन्य संपत्तियों पर कब्जा लिया जा चुका है अथवा लिया जा रहा है, लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही रोजगार के एवज में निर्धारित ₹5 लाख की राशि प्रदान की गई है।

प्रभावित परिवारों के अनुसार रेलवे विभाग ने माननीय मजिस्ट्रेट न्यायालय देवसर में लंबित अपराधिक प्रकरण क्रमांक यूएनसीआर 59/2025 एवं यूएनसीआर 41/2024 में अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रस्तुत जवाब में यह स्वीकार किया है कि रोजगार देने की पूर्व प्रक्रिया वापस ले ली गई है। साथ ही विभाग ने यह भी माना है कि दूसरी अनुसूची के अंतर्गत पात्र प्रभावित व्यक्तियों को, जिन्हें रोजगार नहीं मिला है, उन्हें ₹5 लाख दिए जाने का प्रावधान है।
इसके बावजूद प्रभावितों का कहना है कि रेलवे विभाग एवं राजस्व विभाग द्वारा अब तक किसी भी पात्र व्यक्ति को उक्त राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए तथा भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 38(1) के तहत आवश्यक नोटिस दिए बिना पुलिस बल के माध्यम से भूमि पर कब्जा लिया जा रहा है, जो विधि विरुद्ध है।

प्रभावित परिवारों एवं आम जनता ने मांग की है कि अन्य जिलों की तरह सिंगरौली जिले के प्रभावित परिवारों को भी रेलवे विभाग में रोजगार दिया जाए। यदि रोजगार नहीं दिया जा रहा है तो न्यायालय में प्रस्तुत जवाब के अनुसार प्रत्येक पात्र प्रभावित व्यक्ति को तत्काल ₹5 लाख की राशि प्रदान की जाए। साथ ही बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।

प्रभावितों ने कहा कि रेलवे परियोजना विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी कर विकास कार्य कराना उचित नहीं है। चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई तो प्रभावित परिवार लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से आंदोलन और परियोजना का विरोध करने के लिए बाध्य होंगे।
सार्वजनिक निवेदन के माध्यम से रेलवे विभाग एवं राजस्व विभाग से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए शीघ्र रोजगार अथवा ₹5 लाख मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

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