शीर्षक: “विकास या विनाश?”—हनुमान मंदिर परिसर में ध्वस्तीकरण को लेकर उठे गंभीर प्रश्न


शीर्षक: “विकास या विनाश?”—हनुमान मंदिर परिसर में ध्वस्तीकरण को लेकर उठे गंभीर प्रश्न
सिंगरौली/चितरंगी।
जिले के चितरंगी विकासखंड अंतर्गत स्थित प्राचीन दोरज हनुमान मंदिर परिसर में हाल ही में किए गए निर्माण कार्यों के ध्वस्तीकरण का मामला अब जनचर्चा का विषय बन गया है। वर्ष 2023 में सार्वजनिक उपयोग हेतु निर्मित चबूतरों, सामुदायिक भवन एवं अन्य संरचनाओं को वर्ष 2025 में अचानक बुलडोजर चलाकर हटाए जाने से स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी व्याप्त है तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
सार्वजनिक धन से हुए थे निर्माण कार्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत डिघवार एवं पोड़ी क्षेत्रांतर्गत मंदिर परिसर में लगभग 2 लाख 20 हजार रुपये प्रति लागत से दो पक्के चबूतरे निर्मित किए गए थे। इसके अतिरिक्त एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया गया था, जो ग्रामीणों के सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र था।
बिना पूर्व सूचना ध्वस्तीकरण का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उक्त निर्माण कार्यों को बिना किसी पूर्व सूचना, सार्वजनिक सहमति अथवा स्पष्ट प्रशासनिक आदेश के अचानक ध्वस्त कर दिया गया। चबूतरों एवं सामुदायिक भवन को पूर्णतः नष्ट कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

धार्मिक संरचना एवं वृक्षों को भी नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित राम मंदिर की आधार संरचना (प्लिंथ लेवल), जिसका भूमि पूजन पूर्व विधायक अमर सिंह द्वारा किया गया था, उसे भी हटाया गया। साथ ही परिसर में स्थित नीम एवं आम जैसे पुराने वृक्षों की कटाई भी की गई, जिससे पर्यावरणीय क्षति का भी मुद्दा सामने आया है।
सार्वजनिक सुविधाओं पर भी प्रभाव
बताया गया है कि हाल ही में निर्मित सार्वजनिक शौचालय, किचन शेड तथा अन्य सुविधाओं को भी हटाया गया। इसके अतिरिक्त पहाड़ी क्षेत्र को समतल करने की कार्रवाई भी की गई, जिससे स्थल की मूल संरचना प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक अनुमति पर उठे प्रश्न
इस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उभरकर सामने आए हैं—
क्या ध्वस्तीकरण हेतु विधिवत प्रशासनिक अनुमति प्राप्त की गई थी?
यदि हाँ, तो किस सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश जारी किया गया?
यदि नहीं, तो क्या यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की श्रेणी में नहीं आता?
निगरानी तंत्र पर सवाल
मामले ने पंचायत से लेकर जिला स्तर तक की निगरानी एवं समन्वय व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। सार्वजनिक धन से निर्मित परिसंपत्तियों का इस प्रकार हटाया जाना योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन में कमी को इंगित करता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह न केवल सार्वजनिक संसाधनों की हानि है, बल्कि जनभावनाओं एवं आस्था से भी जुड़ा विषय है।
निष्कर्ष
वर्तमान स्थिति में यह आवश्यक है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित करें तथा उत्तरदायित्व निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई करें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
श्री मान सिंह चंदेल स्पेशल संवाददाता सिंगरौली सीधी













