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मक्के के दाम में लगातार गिरावट से किसान परेशान

अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी और घरेलू मांग घटने से MSP से नीचे बिक रही फसल

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मक्के की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे देशभर के किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक समय ऊंचे दाम पर बिकने वाला मक्का अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 470 डॉलर प्रति बुशेल से नीचे पहुंच गया है। वहीं देश की कई मंडियों में मक्का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी कम दाम पर बिक रहा है। इससे किसानों को लागत निकालना तक मुश्किल हो रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट की बड़ी वजह चीन की कमजोर खरीद बनी हुई है। उम्मीद जताई जा रही थी कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद करेगा, लेकिन कॉर्न यानी मक्का की मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने भी माना है कि पिछले दो वर्षों से चीन की खरीद कमजोर बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव बना हुआ है।

भू-राजनीतिक तनाव का भी असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भी कृषि बाजार पर दिखाई दे रहा है। ईंधन और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ी है, जबकि बाजार भाव लगातार कमजोर बने हुए हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक प्रभावित हो रही है।

MSP से नीचे बिक रहा मक्का

देश की मंडियों में किसानों को मक्का का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मंडी आंकड़ों के अनुसार 18 मई को मक्का का औसत भाव 1872 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 19 मई को बढ़कर 1885 रुपये पहुंचा, लेकिन 20 मई को फिर गिरकर 1869 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। लगातार उतार-चढ़ाव और कमजोर मांग से बाजार में दबाव बना हुआ है।

उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

वर्ष 2026 में देश का मक्का उत्पादन लगभग 461.49 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। वहीं जनवरी 2026 में मक्का निर्यात 1.98 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। मई 2026 में देशभर की मंडियों में कुल 6.11 लाख मीट्रिक टन से अधिक मक्के की आवक दर्ज हुई है।

किसानों को राहत की जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू खरीद और निर्यात में तेजी नहीं आई तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े मक्का उत्पादक राज्यों के किसान दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

विशेषज्ञों ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप बढ़ाने, सरकारी खरीद मजबूत करने और एथेनॉल व पशु चारा उद्योग में मक्के की मांग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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