हिमाचल में जंगलों की आग से बढ़ी चिंता, 232 घटनाओं में 3000 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित

शिमला। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य में मौजूदा फायर सीजन के दौरान अब तक 232 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे लगभग 3000 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वन विभाग के अनुसार अब तक करीब 67 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स संजय सूद ने बुधवार को शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि पिछले दो से तीन दिनों में तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। ऊना में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि शिमला सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, लेकिन वन विभाग पूरी तरह सतर्क है और हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मंडी रहा है, जहां करीब 85 घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद धर्मशाला क्षेत्र में 56 घटनाएं दर्ज की गईं। राजधानी शिमला में करीब 10 और सोलन में छह बड़ी आग की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। विभाग के अनुसार आग से प्रभावित वन क्षेत्र लगभग 2900 से 3000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।
सोलन जिले में एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक लगी भीषण आग को इस सीजन की सबसे गंभीर घटनाओं में माना जा रहा है। आग तेजी से आसपास के गांवों की ओर फैलने लगी थी, जिसके बाद भारतीय वायुसेना, स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीमों ने करीब 15 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई।
वन विभाग ने बताया कि संभावित खतरे को देखते हुए पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। राज्यभर के लगभग 2000 संवेदनशील वन क्षेत्रों में विशेष अग्निशमन कर्मियों और फील्ड स्टाफ की तैनाती की गई है। इसके अलावा सर्किल स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
आग पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में 10 से 12 ड्रोन तैनात किए गए हैं और ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी तथा मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग का दावा है कि इससे आग की सूचना मिलते ही कुछ ही सेकंड में संबंधित अधिकारियों तक अलर्ट पहुंच जाता है।
वन विभाग ने राज्यभर में लगभग 3000 किलोमीटर लंबी फायर लाइनें तैयार की हैं तथा करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रित दहन (कंट्रोल्ड बर्निंग) किया गया है, ताकि सूखी घास और पत्तियों के कारण आग तेजी से न फैल सके।
इस वर्ष आग से निपटने की तैयारियों और नियंत्रण कार्यों पर लगभग 15 से 16 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। केंद्र सरकार की फॉरेस्ट फायर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को करीब 8 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा फ्रांस समर्थित परियोजना के तहत राज्य को लगभग 9 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्राप्त हुई है।
वन विभाग के अनुसार आग पर नियंत्रण में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। विभाग ने एक लाख से अधिक लोगों को मोबाइल कम्युनिकेशन सिस्टम से जोड़ा है, जिससे आग लगने की स्थिति में आसपास के लोगों को तुरंत सूचना भेजी जाती है। युवा मंडल, महिला मंडल और स्थानीय समुदाय भी सक्रिय रूप से आग बुझाने के कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
फायर सीजन को देखते हुए बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जैसे संवेदनशील जिलों में वन विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। विभाग ने लोगों से जंगलों में आग रोकने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहयोग की अपील की है।













