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हर सैनिक को ड्रोन चलाना आना चाहिए: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

 

 

पुणे। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भविष्य के युद्धक्षेत्रों में ड्रोन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है, इसलिए प्रत्येक सैनिक को ड्रोन संचालित करने की क्षमता से लैस होना चाहिए। उन्होंने बताया कि सेना कैडेटों और जवानों को ड्रोन, सिमुलेटर और ड्रोन-रोधी तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण दे रही है।

 

पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में जनरल द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद ‘ईगल ऑन द आर्म’ की अवधारणा रखी थी। इसका आशय यह है कि हर सैनिक के हाथ में ड्रोन संचालन की क्षमता होनी चाहिए।

 

उन्होंने बताया कि सेना की अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों में ड्रोन संचालन के लिए आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित की जा रही है। कैडेटों को वास्तविक ड्रोन और सिमुलेटर के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

 

सेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सैनिकों को ड्रोन उड़ाने के साथ-साथ ड्रोन-रोधी प्रणालियों की भी जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे हवाई खतरों का प्रभावी मुकाबला कर सकें।

 

इस दौरान उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के थिएटराइजेशन की दिशा में हो रही प्रगति पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सैन्य कमानों के पुनर्गठन से संबंधित सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। वर्तमान में विभिन्न हितधारक इसकी समीक्षा कर रहे हैं।

 

जनरल द्विवेदी ने कहा कि थिएटर कमांड व्यवस्था से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित होगा, जिससे देश की सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के नेतृत्व में यह सुधार प्रक्रिया आगे और गति प्राप्त करे।।

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