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15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के लिए BCCI का विशेष फैसला: इंग्लैंड दौरे पर परिवार को साथ ले जाने की मिली अनुमति

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के लिए एक ऐतिहासिक और विशेष व्यवस्था की है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज के लिए सीनियर भारतीय टीम में चुने गए 15 वर्षीय वैभव को इंग्लैंड दौरे पर अपने माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य को साथ रखने की अनुमति दी गई है।

बोर्ड का मानना है कि इतनी कम उम्र में पहली बार सीनियर टीम के साथ विदेशी दौरे पर जा रहे खिलाड़ी के लिए पारिवारिक समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि वैभव अब तक अपनी उम्र के खिलाड़ियों (जूनियर लेवल) के साथ ही यात्रा और प्रतियोगिताओं का हिस्सा रहे हैं। सीनियर टीम का माहौल पूरी तरह अलग होता है, ऐसे में परिवार का साथ उन्हें नए माहौल में सहज महसूस कराने में मदद करेगा।

नाबालिग होने के कारण बोर्ड कराएगा आवश्यक सहयोग
सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि वैभव अभी नाबालिग हैं और उनकी उम्र को ध्यान में रखकर ही यह संवेदनशील फैसला लिया गया है। यदि उनका परिवार इंग्लैंड दौरे पर साथ जाना चाहता है, तो बोर्ड उन्हें हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा। फिलहाल, वैभव श्रीलंका में इंडिया-ए टीम के साथ त्रिकोणीय सीरीज खेल रहे हैं, जहां उनके पिता भी जल्द ही पहुंचने वाले हैं।

IPL 2026 में मचाया था धमाल, जीते कई अवॉर्ड्स
वैभव सूर्यवंशी का सीनियर टीम में चयन उनके हालिया असाधारण प्रदर्शन का इनाम है। उन्होंने अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 175 रनों की यादगार पारी खेलकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया था। इसके बाद आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने तहलका मचा दिया। वैभव ने 16 मैचों में शानदार 776 रन बनाए और ‘ऑरेंज कैप’ सहित कई व्यक्तिगत पुरस्कार अपने नाम किए।

चयनकर्ताओं को वैभव से बड़ी उम्मीदें
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने युवा बल्लेबाज की तारीफ करते हुए कहा कि वैभव ने किसी सिफारिश से नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से अपने प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई है। कम उम्र में दबाव भरे बड़े मुकाबलों में उनका प्रदर्शन असाधारण रहा है और उनमें अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता है।

क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह युवा खिलाड़ी सीनियर भारतीय जर्सी में मैदान पर उतरकर अपने करियर का एक और स्वर्णिम अध्याय लिख पाएगा। बीसीसीआई का यह कदम दर्शाता है कि बोर्ड अब खिलाड़ियों के तकनीकी खेल के साथ-साथ उनके मानसिक और भावनात्मक विकास को भी प्राथमिकता दे रहा है।

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